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यमन में हूती विद्रोही AI से बना रहे बैलिस्टिक मिसाइल! बढ़ी चिंता

Weapon Development AI Safety: एआई दोधारी तलवार है। इसका सदुपयोग और दुरुपयोग किया जा सकता है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यमन में हूती विद्रोही ने विनाशकारी हथियार बनाने के लिए AI का सहारा लिया है।
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भारत

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Saurabh Mall

Sep 11, 2026

Yemen Houthi Rebels AI Weapons

यमन में मिसाइल प्रोग्राम के लिए AI का इस्तेमाल। फोटो में हूती विद्रोही (सोर्स-आईएएनएस)

Yemen Houthi Rebels AI Weapons: ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ यानी AI दुनिया को तेजी से बदल रहा है। इसका इस्तेमाल पढ़ाई से लेकर रिसर्च और इंजीनियरिंग तक हो रहा है। लेकिन अब इसके गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट में यमन से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक वेपन इंजीनियरिंग सेल ने मिसाइल और गाइडेड रॉकेट से जुड़े सॉफ्टवेयर काम के लिए AI मॉडल का इस्तेमाल किया।

मिसाइल प्रोग्राम में AI की मदद का दावा

एंथ्रोपिक के अनुसार, यमन में मौजूद एक ग्रुप कई मिसाइल प्रोग्राम पर काम कर रहा था। इनमें लंबी दूरी की एक मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी। रिपोर्ट में R2000 नाम के एक मिसाइल सिस्टम का भी जिक्र किया गया है।

कंपनी का कहना है कि इस ग्रुप ने AI की मदद से उड़ने वाली मशीनों के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर तैयार किया। इसका इस्तेमाल गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल से जुड़े कामों में किया गया। हालांकि, एंथ्रोपिक को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि इन प्रयासों से कोई ऑपरेशनल हथियार सफलतापूर्वक इस्तेमाल हुआ। कंपनी ने बताया कि एक गाइडेड रॉकेट का टेस्ट लॉन्च जरूर किया गया था। यह टेस्ट असफल होता दिखाई दिया। यह यमन के हूती विद्रोही का भी काम हो सकता है।

AI ने कम किया इंजीनियरिंग का काम

रिपोर्ट के मुताबिक, AI का इस्तेमाल सिर्फ कोड लिखने तक सीमित नहीं था। इसका उपयोग सॉफ्टवेयर से जुड़े कई इंजीनियरिंग कामों में किया गया। इसी ग्रुप ने अलग-अलग क्लाउड इंस्टेंस का इस्तेमाल किया। एक का इस्तेमाल कोडिंग के लिए हुआ। दूसरे से रिसर्च कराई गई। तीसरे से तैयार किए गए कोड की समीक्षा कराई गई।

एंथ्रोपिक का कहना है कि यूजर्स ने कंपनी के सुरक्षा उपायों को चकमा देने की कोशिश भी की। उन्होंने अपने असली उद्देश्य को छिपाया। गतिविधियों को अलग-अलग सेशन में बांटा गया।

दूसरे खतरों पर भी नजर

एंथ्रोपिक के मुताबिक, यमन का मामला अकेला नहीं था। कंपनी ने हथियारों से जुड़े चार ऑपरेशन की पहचान की। इनमें ड्रोन स्वॉर्म, टॉरपीडो से बचाव और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े सॉफ्टवेयर भी शामिल थे। रिपोर्ट में जैविक रिसर्च को लेकर भी चिंता जताई गई है। कंपनी ने 30 दिनों में करीब 35 ऐसी रिसर्च कोशिशों की पहचान की, जिनमें संभावित रूप से चिंताजनक गतिविधियां थीं। हालांकि, हर मामले में नुकसान पहुंचाने का इरादा साबित नहीं हुआ।

एंथ्रोपिक ने चेतावनी दी है कि AI अब जटिल तकनीकी कामों को आसान बना रहा है। इससे विशेषज्ञ इंजीनियरिंग काम के लिए जरूरी समय और मेहनत कम हो सकती है। यही वजह है कि AI कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। तकनीक को उपयोगी बनाए रखना भी जरूरी है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इसका इस्तेमाल खतरनाक गतिविधियों में न हो।