
अमेरिका (United States Of America) के हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। ओमान (Oman) के तट और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास 10 जून को एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी नेवी ने हमला कर दिया था। पलाउ के झंडे वाले इस जहाज पर भारतीय क्रू मेंबर्स थे। अमेरिकी हमले के बाद 21 नाविकों को तो बचा लिया गया, लेकिन 3 लापता हो गए। अब तीनों की मौत की पुष्टि हो गई है। मृतकों में डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल हैं। हमले के बाद पहले तीनों लापता हो गए थे, जिसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास के मौजूदा उच्चतम अधिकारी को बुलाकर कड़ा विरोध जताया।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "पलाऊ के झंडे वाले जहाज़ MT सेटेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत अफ़सोस हुआ। दुःख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए 3 भारतीय नाविकों में से दो के शव मिलने के बाद तीनों की मौत की पुष्टि हो गई है। यह हमारे समुद्री समुदाय के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान है। मोदी सरकार इस मुश्किल घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके परिजनों की हर संभव मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाए गए चालक दल के सदस्यों की तुरंत घर वापसी सुनिश्चित की जाए और मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए उनके शवों को जल्द से जल्द वापस लाया जाए।"
अमेरिकी नेवी के अनुसार जहाज में ईरानी तेल था और वो होर्मुज स्ट्रेट में लगाई अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज ने सभी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया और रुका नहीं। इसी वजह से अमेरिकी नेवी ने जहाज के इंजन रूम पर हमला किया।
अमेरिकी नेवी ने जानकारी दी कि जब जहाज ने रुकने की सभी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया, तो उन्होंने सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल करते हुए जहाज पर हमला किया।
इस हादसे के बाद अब यह सवाल उठना शुरू हो गया है कि क्या अमेरिकी नेवी को इस बात की खबर थी कि जहाज पर भारतीय नाविक सवार थे? इस हादसे के बाद FSUI के महासचिव मनोज यादव ने कहा है कि अमेरिकी नेवी को इस बात की जानकारी थी कि जहाज पर भारतीय नाविक सवार थे। यादव ने कहा, "मुझे बिल्कुल विश्वास नहीं है कि अमेरिकी नेवी को जहाज पर मौजूद भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों की जानकारी नहीं थी। अगर जहाज ने उनके निर्देशों का पालन नहीं किया था, तो उन्हें हिरासत में लेना एक विकल्प हो सकता था।"