Attack on Donald Trump: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमलावर कैलिफोर्निया का रहने वाला है और उसके पास से कई खतरनाक हथियार भी जब्त किए गए है।
Firing On Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होटल हिल्टन में गोलीबारी करने वाले व्यक्ति की तस्वीर शेयर की है। साथ ही घटना का सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है। जिसमें व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हमलावर की एंट्री दिखाई गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि एक हथियारबंद व्यक्ति ने कार्यक्रम स्थल में जबरन घुसने की कोशिश की।
घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमलावर कैलिफोर्निया का रहने वाला है और उसके पास से कई खतरनाक हथियार भी जब्त किए गए है। साथ ही इस दौरान उन्होंने हमलावर का ईरान संबंध पर भी जवाब दिया।
पत्रकारों ने ट्रंप ने पूछा- क्या हमलावर का ईरान से कोई संबंध है? इसका जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि नहीं मुझे नहीं लगता कि इसका ईरान से कोई संबंध है।
उन्होंने घटना के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि हमले में एक सुरक्षा अधिकारी घायल हुआ, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उसकी जान बच गई।
ट्रंप ने कहा कि एक व्यक्ति कई हथियारों के साथ सुरक्षा चेकपॉइंट की ओर बढ़ा, लेकिन सीक्रेट सर्विस के बहादुर जवानों ने उसे तुरंत ढेर कर दिया।
इस घटना के बाद ट्रंप ने कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और व्हाइट हाउस में प्रस्तावित नए बॉलरूम की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा जगह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और नए बॉलरूम में ड्रोन-प्रूफ और बुलेटप्रूफ ग्लास जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही गोली जैसी आवाज सुनाई दी, हॉल में अफरा-तफरी मच गई। पहले इसे बर्तनों के गिरने की आवाज समझा गया, लेकिन कुछ ही सेकंड में लोग टेबल के नीचे छिपने लगे। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति, कैबिनेट सदस्यों और अन्य वीआईपी को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस को भी सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीक्रेट सर्विस और कानून-व्यवस्था एजेंसियों ने बेहद तेजी और बहादुरी से काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम को जारी रखने का फैसला पूरी तरह सुरक्षा एजेंसियों पर छोड़ा गया है।