
FSUI Indian Navy Deployment: फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की अधिकतम तैनाती की मांग की है। यह मांग यमन के तट के पास लाल सागर में व्यापारिक जहाज 'एमएसवी फैज़े नूरे ओलिया' के डूबने की घटना के एक दिन बाद की गई है। इस संबंध में FSUI ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में FSUI ने ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला दिया है। पत्र में कहा गया है कि इन संघर्षों के कारण व्यापारिक समुद्री मार्ग बेहद खतरनाक हो गए हैं। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के कारण व्यापारी जहाज लगातार निशाना बन रहे हैं, जिससे भारतीय नागरिकों की बहुमूल्य जानें खतरे में पड़ रही हैं।
FSUI ने 4 अगस्त की घटना का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि 13 भारतीय चालक दल के सदस्यों वाला भारतीय ध्वजधारी पोत एमएसवी फैज़े नूरे ओलिया बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से गुजरते समय हमले का शिकार हुआ। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। FSUI ने कहा कि यमन सरकार ने इस हमले के लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। यूनियन का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्षों के जल्द समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं। इसलिए उसने केंद्र सरकार से आधिकारिक सलाह के अनुरूप तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाज एमएसवी फैज़े नूरे ओलिया पर हुए हमले की कड़ी निंदा की थी। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा था कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। साथ ही, यमन सरकार द्वारा दिए गए सहयोग के लिए उसका आभार भी व्यक्त किया गया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों पर फिर से बढ़ते हमलों के कारण समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहरा गई हैं।