Geopolitics: बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान सत्ता संभालते ही अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को लेकर बड़े बदलाव कर रहे हैं। उनके नए कूटनीतिक कदमों और चीन-अमेरिका के साथ संतुलन बनाने की रणनीति का भारत के साथ रिश्तों पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है।
Decisions: बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई बीएनपी (BNP) सरकार के मुखिया और नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tarique Rahman Decisions)अब देश की दिशा तय करने के लिए कई कड़े फैसले (Decisions ) ले रहे हैं। शेख हसीना (Hasina Extradition) की अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद, रहमान का पूरा फोकस अब बांग्लादेश की डगमगाती अर्थव्यवस्था (Bangladesh Economy) को फिर से खड़ा करने और अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को चुनने पर है। सत्ता में आते ही उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता जीडीपी को दोगुना करना और नई कूटनीतिक साझेदारी बनाना है।
तारिक रहमान के फैसलों का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ोसी देश भारत पर पड़ रहा है। शेख हसीना के भारत में शरण लेने और नई दिल्ली द्वारा उन्हें सौंपने से इनकार करने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। वीज़ा सेवाएं और खेल आयोजनों का बहिष्कार इसी कड़वाहट का नतीजा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं। भारत के अडानी समूह के साथ हुए बिजली समझौतों (जो बांग्लादेश की 15% बिजली देते हैं) की भी अब कड़ी समीक्षा हो सकती है। जब तक तीस्ता जल बंटवारे और व्यापारिक बाधाओं पर कोई बड़ा समझौता नहीं होता, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पटरी पर आना मुश्किल है।
रहमान सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए सार्क की जगह आसियान (ASEAN) देशों के साथ जुड़ने की इच्छा जताई है। इसका सीधा मतलब है कि बांग्लादेश अब दक्षिण एशिया में भारत पर अपनी निर्भरता कम करके म्यांमार और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापार और विदेशी निवेश बढ़ाना चाहता है। यह कदम भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को कम कर सकता है।
भारत की टेंशन बढ़ाने वाला एक और बड़ा फैसला चीन से जुड़ी नीतियां हैं। चीन पहले ही 24 अरब डॉलर के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और ड्रोन फैक्ट्री के जरिए बांग्लादेश में गहरी पैठ बना चुका है। वहीं, अमेरिका कपड़ों के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है और ऊर्जा क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। तारिक रहमान अगर आर्थिक मदद के लिए चीन की तरफ ज्यादा झुकते हैं, तो यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
रक्षा और विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश अब भारत के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। भारत को अब पुरानी नीतियों को छोड़कर एक नई, व्यावहारिक और दूरदर्शी कूटनीति अपनानी होगी।
बहरहाल, अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर रहमान ने 2034 तक जीडीपी को 1 ट्रिलियन डॉलर करने का वादा किया है। इसके लिए उन्हें हर साल 9% की ग्रोथ चाहिए, जो फिलहाल 4% के आसपास है। महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं को शांत करना उनके लिए चीन या भारत से निपटने से भी बड़ी चुनौती होगी।