जलवायु प्रदूषण दुनियाभर में एक बड़ी समस्या है। जर्मनी की मंत्री स्वेन्जा शुल्ज़ ने इसी विषय पर आज एक बयान देते हुए चीन पर निशाना साधा है।
जलवायु प्रदूषण सिर्फ 2 शब्द ही नहीं, बल्कि वर्तमान समय में दुनियाभर की सबसे बड़ी और चिंताजनक समस्याओं में से एक है। इस आधुनिक दौर में जैसे-जैसे आधुनिकता बढ़ रही है, आधुनिक साधनों की वजह से जलवायु का स्तर नीचे गिर रहा है। आधुनिकता के इस दौर में लोगों के रहन-सहन में भी काफी बदलाव आया है और इस वजह से वो अपने आराम के आगे जलवायु की चिंता नहीं करते हैं। इसी विषय में जर्मनी (Germany) की विकास मंत्री (Development Minister) स्वेन्जा शुल्ज़ (Svenja Schulze) ने आज शुक्रवार, 18 नवंबर को मीडिया से बातचीत में एक बयान दिया है।
चीन पर लगाया आरोप
जर्मनी की विकास मंत्री स्वेन्जा शुल्ज़ ने आज जर्मन मीडिया ब्रॉडकास्टर बेयरिसचे रंडफंक (Bayerischer Rundfunk) से जलवायु प्रदूषण (Climate Damage) के विषय में आज ही बातचीत की। इस बातचीत के दौरान शुल्ज़ ने चीन पर भी निशाना साधा। शुल्ज़ ने जलवायु प्रदूषण के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "दुनियाभर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emission) के मामले में चीन की 28% हिस्सेदारी है। इससे साफ होता है कि चीन काफी हद तक जलवायु प्रदूषण किए लिए काफी हद तक ज़िम्मेदार है। चीन हमेशा से ही तथ्यों को छिपाता रहा है। चीन अभी भी यह कहता है कि वो एक विकासशील देश है, लेकिन सच बात तो यह है कि वो एक विकासशील नहीं, बल्कि विकसित देश है।"
चीन को चुकानी चाहिए कीमत
शुल्ज़ ने इस मीडिया कार्यक्रम में चीन पर सिर्फ जलवायु प्रदूषण का आरोप ही नहीं लगाया, बल्कि उनसे इसकी कीमत चुकाने के लिए भी कहा। यूरोपीय यूनियन (EU) ने हाल ही में एक स्पेशल फंड बनाने की योजना बनाई है, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर ऐसे देश, जहाँ जलवायु प्रदूषण के चलते दुष्प्रभाव देखने क मिलते हैं, वहाँ इस फंड का इस्तेमाल करते हुए ऐसे देशों की मदद की जाएगी। शुल्ज़ ने इस विषय पर भी बात की और चीन को जलवायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक बताते हुए कहा, "EU द्वारा बनाए जा रहे इस फंड में चीन को बड़ी मात्रा में योगदान देते हुए अपनी गलतियों की कीमत चुकानी चाहिए, जिससे चीन की गलतियों की सजा छोटे और कमज़ोर अर्थयवस्था वाले देशों को न मिले।"