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‘दलदल में फंसा अमेरिका’: ईरानी संसद अध्यक्ष घालीबाफ की US को दो टूक, बोले- खुद निकलना होगा बाहर

US Iran war: ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर घालीबाफ ने अमेरिका को चेताया कि गलत आकलन के कारण वह खुद दलदल में फंस गया है। जानें उन्होंने टकराव सुलझाने की जिम्मेदारी किस पर डाली।
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Updated: 25 Oct 2026, 9:30 PM IST
Iran parliament speaker
ईरानी संसद अध्यक्ष घालीबाफ ने अमेरिका को दी चेतावनी, (Photo Source@ChatGpt)

Iran US Conflict: ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर घालीबाफ ने रविवार को अमेरिका को चेतावनी दी कि वह खुद एक संकट में फंस गया है। उन्होंने कहा कि गलत आकलन करने और ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की वजह से अमेरिका खुद एक 'दलदल' में फंस गया है।
ISNA एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, घालीबाफ ने स्पष्ट किया कि मौजूदा टकराव को सुलझाने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की है।

तेहरान में संसद सत्र के दौरान घालीबाफ ने कहा कि, मैंने पहले भी कहा है, हमारे पास कहने के लिए कुछ नया नहीं है। अमेरिका ने गलत आकलन किया और ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा, जिससे वह खुद एक दलदल में फंस गया है। अब उसे ही खुद को बाहर निकालने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।

घालीबाफ बोले: ईरान कभी नहीं झुकेगा

संसदीय नेता ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि सैन्य धमकियों या सार्वजनिक दबाव से ईरान झुक जाएगा। उन्होंने आज के ईरान की तुलना अतीत के नेतृत्व से करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, "अमेरिकी सोचते हैं कि मीडिया के दबाव या सैन्य धमकियों के जरिए वे इस महान राष्ट्र को अपने सामने आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

उन्हें शायद यह नहीं पता कि आज का ईरान, अपमानजनक पहलवी युग वाला ईरान नहीं है। आज का ईरान आत्मविश्वास, रक्षा क्षमता और मजबूत इच्छाशक्ति का एक ऐसा अभेद्य किला है, जो किसी भी विदेशी ताकत को इस देश के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं करने देगा।" क्षेत्रीय तनाव और सैन्य धमकियों का जिक्र करते हुए, घालीबाफ ने चेतावनी दी कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे हालात कितने भी तनावपूर्ण क्यों न हो जाएं।

अमेरिका के इशारे पूरी तरह से बेमानी हैं

घालीबाफ ने जोर देकर कहा, "हम डरने वाले नहीं हैं। अगर महान ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन होता है, तो हम ऐसा जवाब देंगे जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। इसलिए, बड़े पैमाने पर युद्ध या हत्याओं की धमकियां देकर ईरान को अपने अधिकारों और हितों से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।"

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि जब तक अमेरिका अपनी नीति में बुनियादी बदलाव नहीं लाता और ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक उसके राजनयिक दावे या इशारे पूरी तरह से बेमानी हैं। "जब तक अमेरिकी अपना व्यवहार नहीं बदलते, अपनी दादागिरी और लालच को नहीं छोड़ते, और अपने तोड़े गए वादों के लिए ज़मीनी स्तर पर ठोस और वास्तविक सुधार नहीं करते, तब तक उनके किसी भी दावे पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को ज़रा भी भरोसा नहीं होगा।

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25 Oct 2026, 9:30 PM IST
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