Gilgit Baltistan Civil Unrest:गिलगित-बाल्टिस्तान में अंतरिम कैबिनेट के गठन को लेकर भारी बवाल शुरू हो गया है। युवाओं की गिरफ्तारी के बाद हालात बेकाबू हैं, और पाकिस्तान में बड़े संकट की आशंका जताई जा रही है।
Caretaker Cabinet Row PoGB: नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में बड़ा संकट पैदा हो गया है। यहाँ की अंतरिम सरकार (Caretaker Cabinet) के गठन में भेदभाव और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया है। 'जीबी यूथ मूवमेंट' (GB Youth Movement) के नेतृत्व में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में घोषित 14 सदस्यीय केयरटेकर कैबिनेट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जो पहले भी राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों में धांधली करने की एक सोची-समझी साजिश है।
घनचे (Ghanche), नगर और शिगर जैसे जिलों को इस कैबिनेट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है, जिससे वहां की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान गिलगित पुलिस ने 'जीबी यूथ मूवमेंट' के अध्यक्ष अज़फर जमशेद सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने चिनारबाग में 'रिवर रोड' को पूरी तरह जाम कर दिया है।
गिलगित-बाल्टिस्तान की ये चिंगारी अब पूरे पाकिस्तान को अपनी चपेट में ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक विरोध नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व पर मंडराते बड़े संकट का संकेत है:
गिलगित के अलावा पाकिस्तान के अन्य हिस्सों (जैसे कराची और इस्लामाबाद) में रहने वाले जीबी के युवा भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक कंगाली और आतंकवाद (TTP हमलों) से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में जनता का यह आक्रोश सैन्य नेतृत्व के खिलाफ एक बड़े विद्रोह का रूप ले सकता है।
प्रदर्शनकारी लंबे समय से भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और कुछ गुट तो अब सीधे तौर पर पाकिस्तान से अलग होने या लद्दाख में विलय तक की बात कर रहे हैं।
इस राजनीतिक बवाल के बीच पाकिस्तानी सेना को प्राकृतिक आपदा का भी सामना करना पड़ा है। हाल ही में गिलगित-बाल्टिस्तान में आए एक बर्फीले तूफान (Avalanche) में एक कप्तान सहित तीन पाकिस्तानी सैनिक शहीद हो गए हैं। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सेना की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।