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हाथ में पकड़े जा सकने वाला डिवाइस कैंसर का लगाएगा पता, चीन में हुआ डेवलप

चीन में हाथ का एक ऐसा डिवाइस डेवलप हुआ है, जो कैंसर का पता लगाएगा। कैसे करेगा यह काम? आइए जानते हैं।

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May 30, 2026
China's handheld cancer detecting device
चीन का डिवाइस लगाएगा कैंसर का पता

चीन (China) ने कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए जटिल और बड़ी लैब मशीनों के मुकाबले बेहद छोटा यानी हाथ में आने योग्य डिवाइस विकसित किया है, जिससे सिर्फ खून की एक बूंद से कैंसर की जांच की जा सकती है। इस डिवाइस के बारे में दावा किया गया है कि यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में लगभग 10,000 गुना ज़्यादा संवेदनशील है।

कैसे करेगा काम?

इस डिवाइस में नई तकनीक एक ऐसा 'नैनोफोटोनिक बायोसेंसिंग सिस्टम' तैयार करती है, जिसे क्लिनिकल लैब, दूरस्थ क्षेत्रों और घर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस डिवाइस को हांगझोउ की वेस्टलेक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक वेन लियाओयोंग की टीम ने डेवलप किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सिर्फ कैंसर स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑप्टिकल, इलेक्ट्रिकल और मैग्नेटिक सिग्नल प्रोसेसिंग जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।

कम उपकरणों के साथ हाथ में तकनीक

इस सिस्टम की खास बात यह भी है कि इसमें बहुत कम उपकरणों की ज़रूरत होती है। यह पूरा डिटेक्शन सिस्टम सिर्फ एक 3D बीआईसी सेंसर चिप, एक एलईडी लाइट और एक फोटो डिटेक्टर से मिलकर बन सकता है, जिससे इसे पोर्टेबल और घर पर इस्तेमाल करने योग्य बनाया जा सकता है। ऐसे में यह हाथ में भी आ सकता है। वहीं पारंपरिक कैंसर डिटेक्शन मशीनें एक बड़े रेफ्रिजरेटर जितनी जगह घेरती हैं और केवल लैब में ही इस्तेमाल हो सकती हैं।

पारंपरिक तकनीक एलाइजा से बेहतर परिणाम

इस तकनीक के लिए वैज्ञानिकों ने जियामेन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर लंग कैंसर से जुड़े छोटे एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स की पहचान पर परीक्षण किया। परीक्षण में इस हाथ में पकड़े जा सकने वाले डिवाइस ने पारंपरिक एलाइजा टेस्ट की तुलना में लगभग 10,000 गुना ज़्यादा संवेदनशीलता दिखाई। 171 मरीजों के रक्त सीरम सैम्पल्स पर किए गए परीक्षण में इस तकनीक ने शुरुआती फेफड़ों के कैंसर की पहचान में 94.9% तक सटीकता दिखाई, जबकि ऑपरेशन के बाद निगरानी में 92.1% सटीकता रही। इसके मुकाबले पारंपरिक एलाइजा तकनीक की सटीकता केवल 74.7% रही।

होगा काफी सस्ता?

इस डिवाइस के काफी सस्ता होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि उत्पादन लागत को स्केलेबल विनिर्माण के माध्यम से प्रति चिप सैकड़ों डॉलर से घटाकर लगभग 5 डॉलर कर दिया गया है।

Published on:
30 May 2026 11:11 pm