China energy crisis: होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने और अमेरिका-ईरान विवाद के बीच चीन की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं। रूस ने चीन की ऊर्जा कमी पूरा करने का वादा किया है।
Hormuz Strait: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल रहने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में वाशिंगटन के दखल के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इस कदम का असर न सिर्फ ईरान, बल्कि चीन पर भी पड़ रहा है, जो तेहरान से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। ईरान जहां कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे रहा था, वहीं अब अमेरिका के नियंत्रण के चलते समुद्री व्यापार पर असर पड़ना शुरू हो गया है। इसके चलते पहले से ऊर्जा संकट से जूझ रहे चीन में न सिर्फ पेट्रोल बल्कि प्लास्टिक और उर्वरकों की घरेलू कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर उसके उद्योगों पर पड़ रहा है।
ऐसे माहौल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच बुधवार को बीजिंग में मुलाकात हुई। शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन में सर्गेई लावरोव ने कहा कि मॉस्को चीन की ऊर्जा की कमी की भरपाई कर सकता है, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाला मार्ग अभी भी बाधित है।
लावरोव ने कहा, 'रूस निश्चित रूप से चीन और अन्य देशों में उत्पन्न संसाधनों की कमी को पूरा कर सकता है, जो हमारे साथ समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी आधार पर काम करने में रुचि रखते हैं।'
होर्मुज स्ट्रेट के बहाने अमेरिका चीन-ईरान के बीच संबंधों को कमजोर करना चाहता है। इसकी वजह यह है कि प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान के साथ व्यापार जारी रखे हुए है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 2025 में करीब 9.96 अरब डॉलर का व्यापार दिखाया है। हालांकि, इस व्यापार में तेल का आंकड़ा शामिल नहीं है। यदि तेल के कारोबार को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल व्यापार का 75 प्रतिशत से अधिक हो सकता है।
यही कारण है कि अमेरिका नाकेबंदी कर न सिर्फ ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उसे अपनी बात मानने के लिए मजबूर करना चाहता है, बल्कि चीन के साथ उसके संबंधों को भी कमजोर करना चाहता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे चीनी टैंकर 'रिच स्टैरी' को होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी का सामना करना पड़ा। यह टैंकर बुधवार को खाड़ी से निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते उसे वापस लौटना पड़ा। इससे पहले मंगलवार को भी टैंकर ने होर्मुज पार करने की कोशिश की थी।