बुधवार को ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से एक मालवाहक जहाज अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश में निकला। अमेरिकी डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रूअंस ने उसे रोका और वापस ईरान की ओर मोड़ दिया।
अमेरिकी नौसेना ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर इतनी मजबूत नाकेबंदी कर दी है कि सोमवार से अब तक एक भी जहाज इस रास्ते से नहीं निकल पाया है। सोमवार से अब तक दस जहाजों को वापस भेजा गया है।
बुधवार को एक ताजा घटना सामने आई। ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से एक ईरानी झंडे वाला मालवाहक जहाज निकला और अमेरिकी नाकेबंदी से बचने की कोशिश करते हुए ईरानी तटरेखा के साथ-साथ आगे बढ़ने लगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रूअंस ने इस जहाज को रोका और वापस ईरान की तरफ मोड़ दिया। जहाज अब वापस जा रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने मंगलवार को साफ कहा कि अमेरिकी फौज ने ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह रोक दिया है। न कुछ बाहर जा रहा है, न कुछ अंदर आ रहा है।
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुज़रता है। ईरान का ज़्यादातर तेल निर्यात और बाकी समुद्री व्यापार इसी से होता है।
अगर यह नाकेबंदी लंबे वक्त तक चली तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। पेट्रोल से लेकर रोजमर्रा की चीजें तक महंगी हो सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के अंदर एक और बड़ी बहस छिड़ गई है। अगले हफ्ते वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेट और हाउस की सशस्त्र सेवा समितियों की सुनवाई होगी।
इसमें इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो और अमेरिकी फोर्सेज़ कोरिया के कमांडर जनरल जेवियर ब्रुनसन गवाही देंगे।
इन सुनवाइयों में यह सवाल उठेगा कि मध्य पूर्व में इतनी फौज लगाने से क्या चीन और उत्तर कोरिया जैसे मोर्चों पर अमेरिका कमजोर तो नहीं पड़ रहा।
यह चिंता बेवजह नहीं है। रिपोर्टें आ रही हैं कि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में तैनात अपने THAAD मिसाइल रक्षा सिस्टम का कुछ हिस्सा मध्य पूर्व की तरफ भेज दिया है। इसके अलावा जापान में तैनात 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के हज़ारों मरीन भी इस इलाके में भेजे गए हैं।
यानी अमेरिका एशिया से फौज हटाकर मध्य पूर्व में लगा रहा है। इससे उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल खतरे और चीन की बढ़ती आक्रामकता से निपटने की अमेरिका की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।
एक तरफ हॉर्मुज में ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं। दूसरी तरफ एशिया में चीन और उत्तर कोरिया की हरकतें बढ़ रही हैं। अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर उलझता दिख रहा है और दुनिया देख रही है कि यह खिंचाव कहां जाकर टूटता है।