16 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इजराइल को अमेरिकी हथियार नहीं बेच पाएंगे ट्रंप? 40 सांसदों ने दिया झटका, नेतन्याहू के पक्ष में केवल 7 वोट पडे़

डेमोक्रेटिक पार्टी के 47 में से 40 सीनेटरों ने इजराइल को बख्तरबंद बुलडोजर बेचने के खिलाफ वोट दिया। बर्नी सैंडर्स ने इसे ‘तरक्की’ करार दिया और कहा कि गाजा युद्ध को लेकर अमेरिकी जनता की बेचैनी अब सीनेट तक पहुंच गई है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Apr 16, 2026

israel iran,israel iran war,netanyahu on iran,

बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- IANS)

अमेरिकी राजनीति में कुछ बड़ा हुआ है। डेमोक्रेटिक पार्टी के 47 में से 40 सीनेटरों ने इजराइल को बख्तरबंद बुलडोजर बेचने के खिलाफ वोट दिया। यह वही बुलडोजर हैं जो इजराइली फौज इस्तेमाल करती है।

बर्नी सैंडर्स ने इसे 'तरक्की' बताया और कहा कि अमेरिकी जनता की बात आखिरकार सीनेट तक पहुंची। यह महज एक वोट नहीं था। यह डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर उस बड़ी बेचैनी की झलक है जो गाजा जंग को लेकर काफी वक्त से धीरे-धीरे उबल रही थी।

सैंडर्स बोले- जनता जीती, नेतन्याहू हारे

इंडिपेंडेंट सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने यह प्रस्ताव रखा था। वोटिंग के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि डेमोक्रेटिक दल के 80 फीसदी से ज्यादा सांसद अमेरिकी जनता के साथ खड़े हुए और नेतन्याहू की भयानक और गैरकानूनी जंग को अमेरिकी हथियारों से चलाने से इनकार कर दिया। सैंडर्स काफी वक्त से इजराइल को अमेरिकी सैन्य मदद रोकने की कोशिश कर रहे थे। इस बार उन्हें अपनी पार्टी का बड़ा साथ मिला।

सात सीनेटरों ने की बगावत

हालांकि, सैंडर्स के प्रस्ताव पर पार्टी पूरी तरह एकजुट नहीं रही। सात डेमोक्रेट सीनेटरों ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया यानी इजराइल को हथियार बेचने के पक्ष में रहे।

इनमें सबसे बड़ा नाम था चक शूमर का जो सीनेट में डेमोक्रेट्स के नेता हैं। उनके अलावा रिचर्ड ब्लूमेंथल, क्रिस कून्स, कैथरीन कोर्टेज़ मास्टो, जॉन फेटरमैन, किर्स्टन गिलिब्रैंड और जैकी रोजेन ने भी इजराइल के पक्ष में वोट किया।

खास बात यह रही कि पार्टी के मुखिया का ही अलग रास्ता चुनना बताता है कि डेमोक्रेट्स के अंदर यह मुद्दा कितना संवेदनशील है।

ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पर निशाना

एरिजोना के सीनेटर मार्क केली की बात खास रही। इससे पहले वे सैंडर्स के कुछ प्रस्तावों का विरोध कर चुके थे। लेकिन इस बार उन्होंने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।

वोटिंग से ठीक पहले अपने भाषण में केली ने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों की "लापरवाह नीतियों" ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया। उन्होंने माना कि यह फैसला आसान नहीं था।

जनता की राय पहले से साफ

अगस्त 2025 में Quinnipiac यूनिवर्सिटी के एक सर्वे में 75 फीसदी डेमोक्रेट वोटरों ने कहा था कि अमेरिका को गाजा जंग के लिए इजराइल को और सैन्य मदद नहीं देनी चाहिए।

यानी पार्टी की जनता का मूड पहले से बदला हुआ था। सीनेट के इस वोट ने उसी भावना को आधिकारिक रूप दे दिया। यह वोट भले ही बुलडोजर बिक्री पर था लेकिन असल में यह अमेरिकी राजनीति में इजराइल नीति को लेकर एक बड़े बदलाव का संकेत है।