
Donald Trump: भारत के एक अनजान सोशल मीडिया (X) अकाउंट से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक फर्जी दावा पोस्ट किया गया। सिर्फ कुछ ही घंटों के अंदर यह अफवाह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण और अमेरिकी ट्रंप प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंच गई। हालांकि, जांच में दावा पूरी तरह बेबुनियाद साबित होने के बाद नेताओं ने अपनी पोस्ट चुपचाप डिलीट भी कर दी।
इस पूरी कहानी की शुरुआत 5 अगस्त को हुई। भारत के एक X अकाउंट ने एक पोस्ट शेयर की। पोस्ट में दावा किया गया कि ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी ने कहा है कि उनका देश तब तक परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं छोड़ेगा, जब तक इजरायल और अमेरिका के पास ये हथियार मौजूद हैं। बात यहीं खत्म नहीं हुई, इस पोस्ट को ज्यादा असरदार बनाने के लिए जनरल की फोटो के साथ AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार की गई एक परमाणु धमाके (मशरूम क्लाउड) की तस्वीर भी लगा दी गई। कुछ ही घंटों में भारत के एक अन्य अकाउंट ने इसका हिंदी अनुवाद भी शेयर कर दिया।
इंटरनेट पर इस फर्जी खबर को 'Mossad Commentary' नाम के एक इजरायली सोशल मीडिया अकाउंट ने आगे बढ़ा दिया। इसके तुरंत बाद इजरायल के एक प्रमुख टीवी चैनल ने इसे ईरान की तरफ से 'परमाणु बम बनाने का पहला कबूलनामा' बताकर ब्रॉडकास्ट कर दिया। देखते ही देखते खबर इतनी वायरल हुई कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने इसे शेयर किया और सिर्फ तीन घंटे के अंदर खुद पीएम नेतन्याहू ने यरुशलम के माउंट हर्जल में दिए अपने भाषण में इसे ईरान की मंशा का सबसे बड़ा सबूत बता दिया।
इजरायल के बाद यह अफवाह अमेरिका तक जा पहुंची। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के बड़े अधिकारी माइक वॉल्ट्ज ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि 'ईरान आखिरकार वही मान रहा है जो सालों से साफ था।' फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट और अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल फॉक्स न्यूज ने भी इस खबर को सच मानकर चला दिया।
जब इस खबर की जांच की गई, तो पता चला कि ऐसा कोई बयान ईरान की तरफ से दिया ही नहीं गया था। झूठ सामने आते ही माइक वॉल्ट्ज सहित कई बड़े नेताओं ने बिना किसी सफाई के चुपचाप अपनी सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दी।वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने देश के खिलाफ रचा गया एक साजिशी झूठ करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ईरान पर ऐसे ही झूठे आरोप लगाए जाते रहे हैं।