
India-China Border Tension : भारत और चीन सीमा पर तनाव रहना कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों के बीच किसी न किसी सीमा पर तनाव रहता ही है। ताजा मामला अरुणाचल प्रदेश का है, जहां आदिवासी संगठन ने आरोप लगाया था कि चीन ने भारत से लगती अरुणाचल प्रदेश सीमा पर सड़क और कैम्प बना लिए हैं। भारत इसे घुसपैठ और अतिक्रमण कह रहा है और चीन इस पर खामोश है। ऐसा समझा जाने लगा कि अब संघर्ष हो, अब संघर्ष हो। बात साफ न होने के कारण धारणाएं बन गईं और यह बात तनाव का कारण भी बन गई।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन के मामले में, बिना सीमांकन वाली सीमा को लेकर अलग-अलग राय हैं। भारत में कई राजनीतिक गुट इस सिद्धांत की वकालत कर रहे हैं और यह लंबे समय से आधिकारिक सैन्य और रणनीतिक नीतियों का हिस्सा रहा है। इस जगह तनाव का कारण यह है कि दोनों देशों के बीच बॉर्डर लाइन नहीं है। इसलिए दोनों देश अक्सर उस क्षेत्र तक गश्त करते हैं जिसे वे दोनों एलएसी मानते हैं। तब सुलगता सवाल यह है कि क्या इस सीमा पर संघर्ष के हालात बनेंगे?
ध्यान रहे कि गौरतलब है कि सन 2020 के संकट ने पूर्वी लद्दाख में 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर भारत की सैन्य स्थिति पूरी तरह से बदल दी है। तब से, भारत ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, निगरानी बढ़ाई है, सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आई है, रणनीतिक भंडार और पुल बनाए हैं, और सीमा पर लॉजिस्टिकल क्षमताएं मजबूत की हैं। भारत और चीन के बीच तनाव कम करने और मतभेदों को दूर करने के लिए कोर कमांडर स्तर की वार्ता और राजनयिक बातचीत के कई दौर भी हो चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में नाह आदिवासी समुदाय के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली नाह वेलफेयर सोसाइटी की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद ताजा विवाद शुरू हुआ। सोसाइटी का आरोप है कि पीएलए ने पिछले कई बरसों के दौरान ऊपरी सुबनसिरी जिले के कुछ हिस्सों में धीरे-धीरे कब्जा कर लिया है।
भारत-चीन सीमा की प्रकृति ही अलग है। पाकिस्तान या बांग्लादेश के साथ भारत की सीमाओं के विपरीत, भारत-चीन सीमा को कभी भी निश्चित रूप से सीमांकित नहीं किया जा सकता है। इसके बजाय, दोनों देश 'लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) से अलग होते हैं। जब एक पक्ष की गश्ती टीमें दूसरे पक्ष के दावे वाले इलाकों में दाखिल होती हैं, तो इस घटना को आम तौर पर 'घुसपैठ' के बजाय 'सीमा-उल्लंघन' कहा जाता है।
उधर भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'हमने कुछ मीडिया रिपोर्टें देखी हैं जिनमें अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए की ओर से हाल ही में अतिक्रमण करने और शिविर स्थापित करने का आरोप लगाया गया है। ऐसा कुछ नहीं हुआ है।अब चूंकि भारतीय सेना यह बात साफ कर चुकी है कि अरुणाचल प्रदेश में कोई अतिक्रमण या घुसपैठ नहीं हुई है तो
संघर्ष के हालात पैदा होने का सवाल ही पैदा नहीं होता