
United Nations Security Council Latest Update: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर अपना सख्त रुख सामने रखा है। भारत ने साफ कहा कि सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल आतंकवादियों को राजनीतिक कारणों से राहत देने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत ने आतंकियों को सूचीबद्ध करने और सूची से हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की है।
UNSC में ओपन डिबेट के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी योजना पटेल ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता बड़ी जिम्मेदारी लेकर आती है। इसका इस्तेमाल किसी देश के राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए।
भारत ने आतंकियों को सूची से हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि केवल राजनीतिक विचारों के आधार पर किसी आतंकवादी को सूची से हटाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इसके लिए स्पष्ट मानदंड जरूरी हैं। पर्याप्त दस्तावेज और ठोस आधार भी होना चाहिए। ऐसे मामलों में नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
भारत के बयान में पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। हालांकि, आतंकवादियों को सूची से हटाने की कोशिशों का मुद्दा उठाकर भारत ने पाकिस्तान की भूमिका पर निशाना साधा।
भारत ने यह भी बताया कि UNSC की आतंकवाद विरोधी समितियों से जुड़े कई पद लंबे समय से खाली हैं। नेतृत्व तय करने में देरी का असर इन समितियों के कामकाज पर पड़ रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इस समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा परिषद से अध्यक्षों की नियुक्ति को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही निश्चित और स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग भी रखी।
भारत ने केवल आतंकवाद का मुद्दा नहीं उठाया। उसने UNSC के कामकाज और ढांचे में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद करीब 80 साल पुराने इतिहास को दर्शाती है। आज दुनिया की परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। ऐसे में परिषद का ढांचा भी बदलना जरूरी है।
भारत ने स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने की मांग दोहराई। भारत ने आएगी कहा कि यह बदलाव केवल बातचीत से नहीं होगा। इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, तय समय सीमा और ठोस प्रक्रिया जरूरी है। भारत ने शांति अभियानों में योगदान देने वाले देशों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उसका कहना है कि सेना और पुलिस भेजने वाले देशों को UNSC के महत्वपूर्ण फैसलों में पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।
कुल मिलाकर, UNSC में भारत का संदेश स्पष्ट रहा। आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड नहीं चल सकते। आतंकियों की सूची से जुड़े फैसले पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। साथ ही सुरक्षा परिषद को राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए।