यूएन में भारतीय प्रवासियों के लिए जर्मनी ने एक बड़ी बात कह दी है। जर्मनी ने भारतीयों को आदर्श प्रवासी बताया है।
जर्मनी ने अपनी माइग्रेशन नीति के तहत भारत को 'सबसे पसंदीदा देश' घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में जर्मनी के बहुपक्षीय मामलों के कमिश्नर फ्लोरियन लॉडी ने कहा कि कुशल वर्करों के लिए भारत आज जर्मनी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। उन्होंने इस सहयोग को 'ट्रिपल विन' करार दिया, जो प्रवासियों, श्रमिक संकट झेल रहे जर्मनी और विशाल वर्क-फोर्स वाले भारत, तीनों के लिए लाभकारी है।
फ्लोरियन ने आगे कहा, "मैं इसे हर दिन बर्लिन की सड़कों पर देखता हूं। जर्मनी में भारतीय ोरवासी बेहद कुशल हैं, खासकर विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में। उनकी असाधारण योग्यता उनकी औसत आय में भी दिखती है, जो जर्मनी की औसत आय से ज़्यादा है।"
फ्लोरियन ने आगे कहा, "वर्ष 2025 में 1,80,000 भारतीयों ने जर्मनी की वर्क-फोर्स में योगदान दिया, जो पिछले दशक की तुलना में 656% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। इसके अलावा लगातार तीन वर्षों से 60,000 से ज़्यादा भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ रहे हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा ग्रुप है।"
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की हालिया भारत यात्रा का ज़िक्र करते हुए फ्लोरियन ने कहा, "भारत, जर्मनी के खास राजनीतिक और आर्थिक साझेदारों में से एक बन गया है, क्योंकि हम स्वतंत्रता, लोकतंत्र और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों और हितों को महत्व देते हैं। 2022 के 'माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट' के तहत वीज़ा प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और डिग्रियों की मान्यता को तेज़ किया जा रहा है। साथ ही भारत में जर्मन भाषा केंद्रों का विस्तार भी किया जा रहा है जिससे युवाओं के लिए रोजगार की राह आसान हो सके।"