प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों के संबंध में हमारा रुख स्पष्ट है। हम वैश्विक बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले बिल को मंजूरी देने के बाद भारत ने प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत प्रस्तावित विधेयक से अवगत है और इससे संबंधित सभी मुद्दों पर सावधानीपूर्वक नजर रख रहा है।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों के संबंध में हमारा रुख स्पष्ट है। हम वैश्विक बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए किफायती दरों पर ऊर्जा उपलब्ध कराने की अनिवार्यता से प्रेरित है। इन्हीं कारकों के आधार पर हम अपनी रणनीति और नीति निर्धारित करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कई मामलों में हम लगातार बातचीत कर रहे हैं। जर्मन चांसलर 12-13 जनवरी को भारत के दौरे पर आ रहे हैं। अहमदाबाद में दोनों नेताओं, हमारे प्रधानमंत्री और जर्मन चांसलर के बीच बाइलेटरल बातचीत होगी। इस दौरान, बाइलेटरल चिंताओं के सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं और उन्होंने हमेशा डिप्लोमैटिक नियमों के अनुसार एक-दूसरे से आपसी सम्मान के साथ बात की है।
बता दें कि रणधीर जायसवाल का यह बयान रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के दिए बयान के बाद आया है। ग्राहम ने गुरुवार को कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर वह महीनों से काम कर रहे थे।
ग्राहम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, "यह सही समय पर होगा, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है और पुतिन केवल बातें कर रहे हैं, निर्दोषों को मारना जारी रखे हुए हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देने वाले सस्ते रूसी तेल खरीदते हैं।