विदेश

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत का बड़ा एक्शन, होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 20,000 भारतीय नाविकों के लिए लॉन्च किया स्पेशल ऑपरेशन

Strait of Hormuz Update: अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास 20,000 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने उन्हें सुरक्षित वापिस लाने के लिए स्पेशल ऑपरेशन लॉन्च किया है।

2 min read
Apr 12, 2026
यूएस-ईरान वॉर अपडेट: फोटो में अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स: ANI और AI जनरेटेड इमेज)

Strait of Hormuz India Evacuation Mission: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाया है। जी हां, जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही बातचीत बेनतीजा रही, भारत तुरंत अलर्ट मोड में आ गया।

ताजा जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने एक स्पेशल ऑपरेशन शुरू किया है, जिसका मकसद सिर्फ अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना ही नहीं, बल्कि देश की एनर्जी सप्लाई को भी बचाना है। यह मिशन इसलिए बेहद अहम है क्योंकि भारत की बड़ी तेल जरूरतें इसी रास्ते से पूरी होती हैं।

ये भी पढ़ें

युद्ध रोकने के लिए पाकिस्तान में चल रही थी हाई-लेवल मीटिंग, इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे अमेरिका को दो जंगी जहाज

बता दें अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के आस-पास हालात (पारस की खाड़ी) में करीब 20,000 भारतीय नाविक और 18 जहाज फंस गए हैं, जिनमें तेल, LPG और LNG जैसी जरूरी सप्लाई लदी है।

पारस की खाड़ी में फंसे हैं तेल-गैस से लदे भारतीय जहाज

कुल जहाज18
LPG से लदे जहाज4
LNG जहाज3
कच्चे तेल के टैंकर11
भारतीय झंडे वाले जहाज5
लीज पर लिए गए जहाज13
होर्मुज के पश्चिम में फंसे जहाज15
ओमान की खाड़ी में फंसे जहाज3
अदन की खाड़ी में फंसे जहाज3
लाल सागर में भारतीय जहाज2

अमेरिका-ईरान का बातचीत बेनतीजा

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी बातचीत बेनतीजा रहा। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता खत्म होते ही ईरान का पूरा प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस्लामाबाद से फौरन निकल गए थे।

बताया जा रहा है कि ईरान की टीम में कुल 71 लोग शामिल थे। इसमें संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे बड़े नेता भी मौजूद थे।

इस पूरे मुद्दे पर ईरानी दूतावास का कहना है कि अमेरिका बातचीत के दौरान समय का दबाव बना रहा था। उन्हें फैसला जल्दी चाहिए था। वहीं ईरान लंबी रणनीति के साथ बैठा था। ईरान धैर्य के साथ बात करना चाहता था।

इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि देश अमेरिका के पिछले वादे तोड़ने को "न भूला है और न भूलेगा"।

ये भी पढ़ें

SIR के दूसरे फेज में 12 राज्यों की वोटर लिस्ट से हटाए गए 5.18 करोड़ नाम; सामने आई वजह
Also Read
View All