Strait of Hormuz Update: अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास 20,000 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने उन्हें सुरक्षित वापिस लाने के लिए स्पेशल ऑपरेशन लॉन्च किया है।
Strait of Hormuz India Evacuation Mission: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाया है। जी हां, जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही बातचीत बेनतीजा रही, भारत तुरंत अलर्ट मोड में आ गया।
ताजा जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने एक स्पेशल ऑपरेशन शुरू किया है, जिसका मकसद सिर्फ अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना ही नहीं, बल्कि देश की एनर्जी सप्लाई को भी बचाना है। यह मिशन इसलिए बेहद अहम है क्योंकि भारत की बड़ी तेल जरूरतें इसी रास्ते से पूरी होती हैं।
बता दें अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के आस-पास हालात (पारस की खाड़ी) में करीब 20,000 भारतीय नाविक और 18 जहाज फंस गए हैं, जिनमें तेल, LPG और LNG जैसी जरूरी सप्लाई लदी है।
| कुल जहाज | 18 |
| LPG से लदे जहाज | 4 |
| LNG जहाज | 3 |
| कच्चे तेल के टैंकर | 11 |
| भारतीय झंडे वाले जहाज | 5 |
| लीज पर लिए गए जहाज | 13 |
| होर्मुज के पश्चिम में फंसे जहाज | 15 |
| ओमान की खाड़ी में फंसे जहाज | 3 |
| अदन की खाड़ी में फंसे जहाज | 3 |
| लाल सागर में भारतीय जहाज | 2 |
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी बातचीत बेनतीजा रहा। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता खत्म होते ही ईरान का पूरा प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस्लामाबाद से फौरन निकल गए थे।
बताया जा रहा है कि ईरान की टीम में कुल 71 लोग शामिल थे। इसमें संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे बड़े नेता भी मौजूद थे।
इस पूरे मुद्दे पर ईरानी दूतावास का कहना है कि अमेरिका बातचीत के दौरान समय का दबाव बना रहा था। उन्हें फैसला जल्दी चाहिए था। वहीं ईरान लंबी रणनीति के साथ बैठा था। ईरान धैर्य के साथ बात करना चाहता था।
इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि देश अमेरिका के पिछले वादे तोड़ने को "न भूला है और न भूलेगा"।