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पाकिस्तान विश्व धरोहर तक्षशिला की कर रहा था रिकंस्ट्रक्शन, UNESCO ने लगाई फटकार

World Heritage Taxila Latest Update: पाकिस्तान विश्व धरोहर तक्षशिला का रिकंस्ट्रक्शन करने जा रहा था। लेकिन UNESCO ने उसकी क्लास लगा दी। वहीं इस मामले पर भारत ने कहा कि विश्व धरोहर किसी एक देश नहीं, पूरी दुनिया की साझा विरासत है।
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Jul 03, 2026
UNESCO Warns Pakistan
तक्षशिला में रिकंस्ट्रक्शन विवाद: भारत ने पाकिस्तान को घेरा, कहा- विश्व धरोहर का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

UNESCO Warns Pakistan: खबर पाकिस्तान की है। फिर एक बार पाकिस्तान ने उल-जलूल हरकत करने की कोशिश की। जिसके बाद उसे फटकार भी झेलनी पड़ी। मामला विश्व धरोहर तक्षशिला से जुड़ा है। जो पाकिस्तान में स्थित है। दरअसल, विश्व धरोहर तक्षशिला में कथित तौर पर किए गए रिकंस्ट्रक्शन पर UNESCO ने कड़ी आपत्ति जताई है। इतना ही नहीं, भारत ने भी इस मुद्दे पर साफ कहा है कि विश्व धरोहर किसी एक देश की संपत्ति नहीं होती, बल्कि पूरी दुनिया की साझा विरासत होती है। ऐसे में उसकी सुरक्षा और संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है।

UNESCO ने पाकिस्तान को दी चेतावनी

तक्षशिला पाकिस्तान का एक ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। इसे UNESCO ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया हुआ है। हाल ही में खबर सामने आई कि यहां की दो ऐतिहासिक जगहों पर रिकंस्ट्रक्शन का काम किया गया। इसके बाद UNESCO ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन के रिपोर्ट्स के मुताबिक, UNESCO ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि जिन निर्माण कार्यों से मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है, उन्हें वापस वैसा ही किया जाए। इस तरह का काम दोबारा नहीं होना चाहिए। विश्व धरोहर स्थल की ऐतिहासिक पहचान और उसकी मौलिकता को नुकसान पहुंचाया नहीं जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, UNESCO ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया तो तक्षशिला को 'डेंजर लिस्ट' में डाला जा सकता है। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर उसे विश्व धरोहर सूची से हटाने पर भी विचार किया जा सकता है।

बताया गया कि यह मामला तब सामने आया जब किसी थर्ड पार्टी ने UNESCO को तस्वीरें और जानकारी भेजी। इनमें मोहरा मोराडू और सिरकप क्षेत्र में किए गए निर्माण कार्य दिखाए गए थे। इसके बाद UNESCO, पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग और संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों ने संयुक्त तकनीकी निरीक्षण भी किया।

निरीक्षण के दौरान UNESCO ने निर्माण से जुड़े दस्तावेज, हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट, पहले और बाद की तस्वीरें, इस्तेमाल की गई सामग्री की टेस्ट रिपोर्ट और नई सामग्री की पुराने ढांचे के साथ उससे जुड़ी जानकारी भी मांगी।

विश्व धरोहर पूरी दुनिया की साझा विरासत: भारत

इस पूरे विवाद पर भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि UNESCO से मान्यता प्राप्त सांस्कृतिक धरोहर किसी एक देश की नहीं होती। न ही किसी एक समाज या व्यक्ति की होती है। यह पूरी दुनिया की साझा विरासत होती है। इसलिए इन स्थलों का संरक्षण और उनकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में तय अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया जाना चाहिए। किसी भी तरह का ऐसा निर्माण या बदलाव, जिससे किसी ऐतिहासिक स्थल की मौलिकता प्रभावित हो, उससे बचना जरूरी है।

वहीं पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों पर सीमेंट जैसी आधुनिक सामग्री का इस्तेमाल UNESCO के संरक्षण मानकों के खिलाफ माना जाता है। ऐसे कदम पाकिस्तान की उस कोशिश को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसके तहत वह कई अन्य ऐतिहासिक स्थलों को भी UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान UNESCO की आपत्तियों पर क्या कदम उठाता है और तक्षशिला के संरक्षण को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।

Published on:
03 Jul 2026 09:11 pm