क्या भारत वास्तव में रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? भारत-US टैरिफ डील के बाद ट्रंप के इस दावे पर पड़ोसी देश चीन ने सवाल उठाए हैं। जहां पीएम मोदी ने टैरिफ कटौती का स्वागत किया, वहीं रूसी तेल पर चुप्पी साधे रखी। पढ़ें, इस कूटनीतिक खेल के पीछे का असली सच।
China on India-US Trade Deal and Russian oil: अमेरिका ने भारत पर लगने वाले 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में मोदी सरकार जहां इस सफलता पर अपनी पीठ थपथपाते नहीं थक रही रही है, वहीं विपक्ष केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है। इन सबके बीच अब पड़ोसी मुल्क चीन की तरफ से प्रतिक्रिया आई है। चीन के सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि भले ही अमेरिका और भारत के बीच 18 प्रतिशत टैरिफ पर सहमति बन गई है, लेकिन दोनों देशों के बयानों में साफ तौर पर अंतर है।
दरअसल, चीन ने डोनाल्ड ट्रंप ने उस दावे का जिक्र किया है, जिसमें कहा गया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर भारत वेनेजुएला से भी तेल खरीद लेगा। इसके अलावा कृषि उत्पाद, तकनीक समेत तमाम अमेरिकी चीजों की खरीद पर भी भारत ने सहमति जताई है।
दूसरी तरफ भारत की तरफ से इस तरह की कोई बात नहीं की गई। पीएम मोदी की ओर से किए गए ट्वीट में ट्रंप के उपरोक्त दो दावों भी इसका उल्लेख नहीं है। उन्होंने टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने और दुनिया भर में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना की है।
'ग्लोबल टाइम्स' लिखता है कि पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि वे टैरिफ कटौती से खुश हैं, लेकिन उन्होंने विवरण साझा करने में सावधानी बरती। इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या उनका देश रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा, जैसा कि ट्रंप ने दावा किया था।
पीएम मोदी ने ट्रंप के उस दावे का भी उल्लेख नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि भारत 500 अरब डॉलर से अधिक की अमेरिकी ऊर्जा, तकनीक, कृषि, कोयला और कई अन्य उत्पादों के अलावा, बहुत उच्च स्तर पर 'बाय अमेरिकन' (अमेरिकी सामान खरीदें) के लिए प्रतिबद्ध है।" ट्रंप ने यह भी कहा है कि भारत अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को "शून्य" करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटेजी इंस्टीट्यूट में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग ने कहा कि फोन कॉल के बाद अमेरिकी और भारतीय नेताओं की ओर से जारी बयानों के लहजे में स्पष्ट अंतर है। उन्होंने नोट किया कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। इसकी पुष्टि भारत की ओर से आधिकारिक दस्तावेज जारी होने के बाद ही की जा सकती है।