
अमेरिका (United States of America) के वॉशिंगटन (Washington) राज्य के बेलव्यू (Bellevue) शहर में रहने वाली भारतीय मूल की 18 वर्षीय छात्रा लक्ष्मी अग्रवाल (Lakshmi Agrawal) ने जूट के बेकार रेशों से ऐसी बायोडिग्रेडेबल स्पंज विकसित की है, जो कारों के टायरों से पैदा होने वाले जहरीले रसायन 6PPD-Quinone को पानी से हटाने में कारगर साबित हुई है। प्रयोगशाला परीक्षणों में स्पंज ने इस प्रदूषक को 80% तक सोख लिया। इस उपलब्धि के लिए लक्ष्मी को दुनिया की प्रतिष्ठित विज्ञान प्रतियोगिता रेजेनेरॉन इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर (आईएसइएफ)-2026 में 75 हजार डॉलर (करीब 71 लाख रुपए) का रेजेनेरॉन यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड मिला।
इंटरलेक हाई स्कूल की छात्रा लक्ष्मी ने बताया कि भारत यात्राओं के दौरान उसने देखा कि जूट का काफी हिस्सा इस्तेमाल के बाद बेकार फेंक दिया जाता है। तभी उसके मन में इस कृषि अपशिष्ट को पर्यावरण संरक्षण के काम में लाने का विचार आया। उसने जूट के रेशों से नैनोसेल्यूलोज़ हाइड्रोस्पंज तैयार की, जो जहरीले रसायन के साथ पानी में मौजूद कुछ भारी धातुओं को भी सोख लेती है। इसकी खासियत यह है कि इस्तेमाल के बाद यह प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाती है और नया प्रदूषण नहीं फैलाती।
वैज्ञानिकों के अनुसार लक्ष्मी की तकनीक मौजूदा फिल्टरों की तुलना में 85% कम ऊर्जा में तैयार होती है और इसकी लागत भी करीब 98% कम है। अगर मैदानी परीक्षण सफल रहे तो यह बहुत उपयोगी साबित हो सकती है और इसका इस्तेमाल वर्षाजल निकासी प्रणाली और जलशोधन संयंत्रों में किया जा सकेगा।
हर बार जब कोई वाहन सड़क पर चलता है, उसके टायरों से बेहद सूक्ष्म कण निकलते हैं। टायरों में मिलाया जाने वाला 6PPD रसायन हवा के संपर्क में आकर 6PPD--Quinone बनाता है। बारिश का पानी इसे नालों के ज़रिए नदियों तक पहुंचा देता है। वैज्ञानिकों ने इसे अमेरिका के प्यूजेट साउंड क्षेत्र में कोहो सैल्मन मछलियों की बड़ी संख्या में मौत का प्रमुख कारण माना है। अब तक इस प्रदूषण को रोकने का सस्ता और टिकाऊ उपाय नहीं था। जूट के कचरे से बनी लक्ष्मी की स्पंज पहली ऐसी तकनीकों में है, जो कम लागत में इस जहरीले रसायन को प्रभावी ढंग से हटाने की क्षमता दिखाती है। इसके इस्तेमाल से लाखों मछलियों की जान बच सकती है।