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इंटरनेट के तार भी ‘सुन’ सकते हैं आपकी बातें! फाइबर ऑप्टिक केबल्स पर रिसर्च ने बढ़ाई प्राइवेसी की चिंता

इंटरनेट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तार जिन्हें फाइबर ऑप्टिक केबल्स कहा जाता है, पर हाल ही में एक नई रिसर्च सामने आ गई है जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्या कहती है यह रिसर्च? आइए नज़र डालते हैं।

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May 11, 2026
Fiber optic cables

अब तक फाइबर ऑप्टिक केबल्स को सिर्फ तेज़ इंटरनेट और सुरक्षित डेटा ट्रांसफर की रीढ़ माना जाता था। लेकिन नई रिसर्च ने संकेत दिया है कि यही केबल भविष्य में 'गुप्त सुनने वाले उपकरण' भी बन सकते हैं। साइंस एडवाइज़र में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार हमारे घरों और दफ्तरों तक इंटरनेट पहुंचाने वाले फाइबर ऑप्टिक केबल आसपास की आवाज़ों से पैदा होने वाले बेहद सूक्ष्म कंपन महसूस कर सकते हैं। यानी जिन तारों से इंटरनेट चलता है, वो अनजाने में बातचीत के 'गवाह' भी बन सकते हैं।

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कैसे काम करती है 'फाइबर जासूसी'?

यह तकनीक डिस्ट्रीब्यूटेड अकॉस्टिक सेंसिंग (डीएएस) पद्धति पर आधारित है। जब हम केबल के पास बात करते हैं, तो ध्वनि की लहरें केबल में मामूली कंपन पैदा करती हैं। ये कंपन केबल के भीतर यात्रा कर रहे प्रकाश संकेतों को थोड़ा विचलित कर देते हैं। वैज्ञानिक विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करके प्रकाश में होने वाले इन बदलावों का विश्लेषण करते हैं और आसपास की बातचीत को डिकोड कर सकते हैं। इसे 'फाइबर जासूसी' कहना भी गलत नहीं होगा।

नई नहीं है यह तकनीक?

यह तकनीक पूरी तरह नई नहीं है। अब तक इसका इस्तेमाल भूकंप का पता लगाने, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और समुद्र के भीतर होने वाली हलचलों को समझने जैसे वैज्ञानिक कार्यों में होता रहा है। शीत युद्ध के दौर में अमेरिका और सोवियत संघ समुद्र के नीचे बिछी टेलीफोन लाइनों को टैप करने की कोशिशें करते थे। लेकिन फाइबर नेटवर्क को ज़्यादा सुरक्षित माना जाता था। अब वैज्ञानिकों का कहना है कि ध्वनि-आधारित विश्लेषण इस सुरक्षा अवधारणा को चुनौती दे सकता है।

सामान्य यूज़र्स के लिए कितना खतरा?

इंटरनेट के लिए इस्तेमाल होने वाले फाइबर ऑप्टिक केबल्स के ज़रिए बातचीत सुने जाने की खबर से लोगों की चिंता बढ़ गई है। लेकिन फिलहाल सामान्य इंटरनेट यूज़र्स को घबराने की जरूरत नहीं है। स्पष्ट बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए बेहद महंगे उपकरण, उच्च तकनीकी दक्षता और नियंत्रित परिस्थितियाँ ज़रूरी हैं। फिर भी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अब फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर की अतिरिक्त सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इसमें केबल्स की बेहतर शिल्डिंग, मज़बूत इंसुलेशन और नेटवर्क एक्सेस की कड़ी निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं।

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