World War 3: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, ट्रंप ने न्यूक्लियर डील पर आखिरी चेतावनी दे दी है। खाड़ी में अमेरिकी बेड़े और ईरानी ड्रोन की तैनाती से World War 3 जैसी आहट सुनाई दे रही है।
Donald Trump: साल 2026 की शुरुआत के साथ ही दुनिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठी हुई नजर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव (Iran-US War) अपने चरम पर है। व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी ने तेहरान के लिए खतरे की घंटी बजा दी (Donald Trump Warning) है। हालत यह है कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु डील (Nuclear Deal) पर लौटने के लिए "अंतिम चेतावनी" दे दी है। राष्ट्रपति ट्रंप का साफ कहना है कि अब वक्त बहुत कम बचा है। अगर ईरान शर्तें नहीं मानता है, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने साफ तौर पर दो बड़ी शर्तें रखी हैं। पहली, अपने परमाणु कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाना और दूसरी, ईरान के अंदर हो रहे प्रदर्शनों पर हिंसा बंद करना। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि सैन्य कार्रवाई से पहले एक 'गुप्त डेडलाइन' तय की गई है। उधर, अमेरिका ने अपने इरादे जाहिर करते हुए इजराइल और सऊदी अरब को अरबों डॉलर के हथियारों की बिक्री करने की मंजूरी दे दी है। अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा (Armada) भी खाड़ी की ओर बढ़ रहा है, जो वेनेजुएला भेजे गए बेड़े से भी विशाल बताया जा रहा है।
अमेरिका के दबाव के आगे झुकने के बजाय ईरान ने भी अपनी आस्तीनें चढ़ा ली हैं। ईरानी सेना ने अपने बेड़े में 1,000 नए और घातक ड्रोन शामिल किए हैं। इसके साथ ही सामरिक रूप से बहुत अहम 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास का ऐलान कर दिया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि वे बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह बराबरी के स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम किसी भी समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा।
नाव के बीच ईरान के दक्षिणी बंदरगाह 'बंदर अब्बास' में जोरदार धमाके की खबरें सामने आई हैं, जिससे सनसनी मच गई है। उधर, यूरोपीय संघ (EU) ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। हालांकि, ईरान ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि धमाकों में IRGC के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तंगसीरी की मौत हो गई है।
सऊदी अरब और ईरान के राष्ट्रपति के बयान इस पूरे घटनाक्रम पर सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने वाशिंगटन में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपनी धमकियों पर अमल नहीं करता, तो ईरान और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देश में हो रहे दंगों को विदेशी साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि अमेरिका और यूरोपीय ताकतें ईरान के समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं।
अब पूरी दुनिया की नजरें उस 'गुप्त डेडलाइन' पर टिकी हुई हैं, जिसका जिक्र ट्रंप ने जिक्र किया है। यह समयसीमा कब खत्म होगी, यह सिर्फ वाशिंगटन और तेहरान के शीर्ष नेतृत्व को ही पता है। अगर कूटनीति विफल होती है और डेडलाइन पार हो जाती है, तो खाड़ी क्षेत्र में एक बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
युद्ध के खतरों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था कराह रही है। अमेरिका का दावा है कि ईरान में इंटरनेट शटडाउन की वजह से लाखों का ऑनलाइन कारोबार ठप पड़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे बिक्री में 80% तक की गिरावट आई है। इसका ईरान के आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों पर सीधा असर पड़ रहा है, जो पहले ही प्रतिबंधों की मार झेल रहे हैं।