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अब ईरान-अमेरिका के बीच समझौता कराने में जुटा साउथ कोरिया, तेहरान ने विवाद खत्म करने के लिए सामने रखी शर्त!

ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर हो गए हैं।
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Updated: 23 Apr 2026, 10:33 AM IST
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मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो: IANS)

मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। इसमें अब बयानबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। इस बीच, अब ईरान-अमेरिका के बीच समझौता कराने के लिए दक्षिण कोरिया भी आगे आ गया है।

दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत में ईरान ने साफ तौर पर अमेरिका और इजराइल को हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

ईरान का आरोप- जिम्मेदार हैं आक्रामक देश

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट में जो भी अस्थिरता पैदा हो रही है, उसके लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह बात दक्षिण कोरिया के विशेष दूत चुंग ब्युंग-हा के साथ तेहरान में हुई बैठक के दौरान कही। उनका कहना है कि ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत कदम उठाए हैं।

'हमने कानून के तहत कदम उठाए'

अराघची ने कहा कि ईरान इस क्षेत्र का अहम तटीय देश है और उसे अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने दोहराया कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी उन देशों की होगी जो आक्रामक रवैया अपना रहे हैं।

कूटनीति की बात भी, रिश्ते मजबूत करने पर जोर

इस बैठक में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप ही नहीं, बल्कि कूटनीति पर भी चर्चा हुई। ईरान ने दक्षिण कोरिया के साथ अपने संबंध मजबूत करने की इच्छा जताई।वहीं दक्षिण कोरियाई दूत ने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए क्षेत्र में शांति बहाल हो सकती है।

ट्रंप का अलग रुख, बातचीत पर जोर

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता सुझाया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझदारी से काम ले और समझौते की दिशा में आगे बढ़े, तो उसका भविष्य बेहतर हो सकता है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगले 36 से 72 घंटे में कोई बड़ा कूटनीतिक कदम उठ सकता है।

ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर साधा निशाना

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के रवैये को 'दोहरे मापदंड' वाला बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ दबाव और प्रतिबंध लगाता है, जिससे असली बातचीत मुश्किल हो जाती है।

बातचीत पर अभी भी सस्पेंस

हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगले दौर की वार्ता में शामिल होने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

दुनिया की नजरें हॉर्मुज पर टिकी

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।

Updated on:
23 Apr 2026, 10:33 AM IST
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