Iran agree peace talks with US: अमेरिका और ईरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के लिए युद्ध विराम समझौते पर सहमति व्यक्त की। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने शांति वार्ता और मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए सकारात्मक संकेत दिए, साथ ही लेबनान को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Middle East: अमेरिका और ईरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के लिए युद्ध विराम समझौते पर सहमति व्यक्त की है। दोनों पक्ष दस बिंदुओं पर सहमत हुए हैं। हालांकि, इस समझौते की तीन शर्तों के उल्लंघन के आरोप के बावजूद ईरान शांति वार्ता के लिए तैयार है। इस संदर्भ में, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि हालिया ईरानी सैन्य कार्रवाई जारी उकसावों का आवश्यक जवाब थी। इस्लामाबाद की मध्यस्थता में किए गए राजनयिक प्रयासों ने स्थिति को स्थिर करने में मदद की। इसके बाद कुछ बार बातचीत हुई और पाकिस्तान के माध्यम से संदेश भी भेजे गए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका अपने सहयोगी (इजरायल) को नियंत्रित कर सकेगा और इस बार वास्तव में अपने वादे का सम्मान करेगा तथा जो तय हुआ है, उसके प्रति प्रतिबद्ध रहेगा।
उच्च स्तरीय वार्ता जारी रहने की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, 'इस समय जब मैं बोल रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि हम पाकिस्तान की ओर आगे बढ़ सकते हैं, और यही वह कार्यक्रम और एजेंडा है जिस पर हम काम कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी पक्ष भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसलिए उम्मीद है कि हम जल्द ही पाकिस्तान में मिल सकेंगे और पूरे मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए एक समझौता कर सकेंगे।
जब लेबनान के प्रति तेहरान की प्रतिबद्धता और वहां इजरायल के हमले जारी रहने से जुड़े सवाल पूछे गए, तो उप विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि ईरान अपने राजनयिक वचन का पालन करता है। ईरान ने सबको दिखा दिया है कि वह शायद ही कभी बातचीत करता है, लेकिन जब वह वार्ता करता है, तो अपने वचन का सम्मान करता है। जो समझौता हुआ है, उसे पूरा करने की कोशिश करता है।
ईरान के उप विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि कुछ क्षेत्रों को अलग-थलग कर दिया जाए या संघर्ष के मूल कारणों की अनदेखी की जाए, तो स्थायी स्थिरता असंभव है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पूरे मध्य पूर्व में हो रही घटनाओं से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। कई दशकों से मध्य पूर्व की अधिकांश समस्याओं की जड़ इजरायल के विनाशकारी और अनैतिक व्यवहार में निहित है।
ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की कोई कल्पना नहीं की जा सकती, जब तक इसमें शामिल सभी पक्षों के लिए एक समावेशी समझौता न हो। खतीबज़ादेह ने दोहराया कि लेबनान को शामिल करना तेहरान की अकेली मांग नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यह केवल ईरान की जिम्मेदारी नहीं है; यह सुनिश्चित करना हर किसी का दायित्व है कि लेबनान को किसी भी शांति समझौते में शामिल किया जाए।