
Middle-East Tensions: ईरान ने अमेरिका और इजरायल को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। ईरानी सेना ने कहा है कि अगर देश को चुनौती दी गई तो हमलावरों को फिर हार का सामना करना पड़ेगा। ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने समुद्री मार्ग होर्मुज (Strait of Hormuz) पर अपनी ऑपरेशनल पकड़ मजबूत कर ली है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल-ईस्ट में सैन्य तनाव और हमलों को लेकर चिंता बनी हुई है। ईरान का कहना है कि उसकी सैन्य क्षमता पहले के मुकाबले काफी मजबूत हुई है।
ईरान के आर्म्ड फोर्सेज जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने संयुक्त बयान जारी किया। यह बयान ‘सेक्रेड डिफेंस वीक’ के दौरान सामने आया। यह सप्ताह 1980 में शुरू हुए ईरान-इराक युद्ध की याद में मनाया जाता है।
ईरानी सैन्य नेतृत्व ने कहा कि सेना, IRGC, रक्षा मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार हैं। बयान में अमेरिका और इजरायल का भी सीधे तौर पर जिक्र किया गया। ईरान ने दावा किया कि अगर कोई विदेशी ताकत देश के खिलाफ कार्रवाई करती है तो उसे पहले से भी ज्यादा कड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा।
ईरानी बयान में होर्मुज स्ट्रेट का खास तौर पर बात किया गया है। बता दें होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से तेल और दूसरे ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान का दावा है कि मौजूदा हालात में उसने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपनी ऑपरेशनल पहुंच और नियंत्रण को मजबूत किया है। तेहरान ने इसे अपनी बढ़ती सैन्य क्षमता के तौर पर बताया है।
ईरानी सैन्य नेतृत्व ने अपने बयान में देश की रक्षा क्षमता और सैन्य आत्मनिर्भरता के बारे में भी जानकारी दी है। उसने कहा कि वर्षों के संघर्षों से ईरान ने कई सबक सीखे हैं। बयान में घरेलू रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को ईरान की ताकत बताया गया। ईरान ने हाल के संघर्षों का जिक्र करते हुए अमेरिका और इजरायल को नुकसान पहुंचाने का दावा भी किया। साथ ही, ईरान ने आठ साल के ईरान-इराक युद्ध को अपनी मौजूदा सैन्य तैयारी की महत्वपूर्ण नींव बताया। उधर, क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है। सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में ईरान का ताजा बयान आने वाले दिनों में मिडिल-ईस्ट की सुरक्षा चिंता का विषय है।