अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्लामाबाद में संभावित वार्ता की खबरें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र मध्यस्थता में जुटे हैं, जबकि दोनों देशों के बयानों में मतभेद बने हुए हैं, जिससे स्थिति संवेदनशील लेकिन उम्मीदों से भरी नजर आ रही है।
Iran-Israel-America War: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब एक नई हलचल देखने को मिल रही है। हालात जहां कुछ दिन पहले तक टकराव की ओर बढ़ते नजर आ रहे थे, वहीं अब कूटनीतिक कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। खास बात यह है कि इस बार बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद का नाम सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं के बीच इसी हफ्ते आमने-सामने बातचीत हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह एक अहम और शायद ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रयास में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र पर्दे के पीछे रहकर बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ये देश दोनों पक्षों को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हालात और न बिगड़ें।
सूत्रों की मानें तो अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इस संभावना ने ही अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इधर पाकिस्तान भी इस मामले में काफी सक्रिय नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की और क्षेत्र में शांति बहाल करने में हर संभव सहयोग का भरोसा दिया। दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक महीने में दोनों नेताओं के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है।
सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सैन्य स्तर पर भी संपर्क जारी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी ईरानी नेतृत्व से बातचीत की है। खबरें यह भी हैं कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी संपर्क किया है। यानी पर्दे के पीछे काफी तेजी से बातचीत चल रही है, भले ही सब कुछ खुलकर सामने न आ रहा हो। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से यह संकेत दिए जा रहे हैं कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और कूटनीति को मौका देने के लिए पांच दिन तक सैन्य कार्रवाई रोक दी गई है। यह बयान अपने आप में अहम माना जा रहा है। लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ईरान ने इन दावों से दूरी बनाई है। उसने साफ कहा है कि पिछले 24 दिनों में अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। यानी दोनों पक्षों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, जिससे स्थिति थोड़ी उलझी हुई भी लगती है।