
फोटो में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई (सोर्स : ANI)
Pentagon: तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी भारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने देश की सेना को हर संभव मदद देने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने सैन्य कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल अमीर हतामी के साथ एक हाई-लेवल सुरक्षा बैठक में साफ किया कि सरकार अपनी पूरी ताकत से सशस्त्र बलों को मजबूत करेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि बाहरी खतरों से निपटने के लिए देश की आंतरिक एकता और मजबूत सेना सबसे जरूरी स्तंभ हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें समृद्ध यूरेनियम के भंडार को देश से बाहर भेजने के लिए कहा गया था। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक ईरान अपना परमाणु भंडार खत्म नहीं करता और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम नष्ट नहीं करता, तब तक वे हमले रोकने वाले नहीं हैं।
फिलहाल पाकिस्तानी मध्यस्थता के जरिये दोनों पक्षों में बातचीत चल रही है, लेकिन ईरानी अधिकारियों को अंदेशा है कि यह सीजफायर अमेरिका की एक चाल हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो अमेरिका नए सैन्य हमलों के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, ईरान का मुख्य यूरेनियम भंडार इस समय इस्फ़हान और नतान्ज परमाणु संयंत्रों की भूमिगत सुरंगों में सुरक्षित है।
इस कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध पर वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान किसी भी कीमत पर अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करेगा, क्योंकि उसे डर है कि ऐसा करने से वह यूक्रेन या लीबिया की तरह पश्चिमी देशों के सामने बेहद कमजोर पड़ जाएगा। वहीं, अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीतियां मध्य पूर्व को एक और विनाशकारी युद्ध की धकेल सकती हैं।
अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तानी मध्यस्थता के तहत हो रही गुप्त वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या ईरान अंतरराष्ट्रीय निगरानी में अपने यूरेनियम भंडार को कम करने के कूटनीतिक विकल्प को स्वीकार करेगा, या फिर राष्ट्रपति ट्रंप की दी गई कुछ दिनों की मोहलत खत्म होते ही अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान पर दोबारा बमबारी शुरू कर देंगे?
इस पूरे विवाद का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू वैश्विक ऊर्जा संकट से जुड़ा हुआ है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध दुबारा भड़कता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है। दुनिया का एक बड़ा तेल और गैस व्यापार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। (इनपुट : ANI)
Published on:
21 May 2026 08:37 pm
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