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जैसा मैं कहूंगा, नेतन्याहू वैसा ही करेंगे; ट्रंप के इस दावे से मची हलचल, इजरायल को क्या समझ रहा अमेरिका

Benjamin Netanyahu: डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि नेतन्याहू पूरी तरह से उनकी बात मानेंगे और जैसा वो कहेंगे, वैसा ही करेंगे।

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MI Zahir

May 20, 2026

Donald Trump and Benjamin Netanyahu

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू । ( फोटो: ANI)

Donald Trump : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर एक बेहद हैरान करने वाला बयान दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में दावा किया है कि नेतन्याहू के साथ उनके रिश्ते और उनका प्रभाव इस स्तर पर है कि इजरायली प्रधानमंत्री वही कदम उठाएंगे जो ट्रंप उन्हें सुझाएंगे। इस बयान के सामने आते ही वैश्विक कूटनीतिज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

उनके बयान के कूटनीतिक मायने

इस टिप्पणी को केवल एक चुनावी या राजनीतिक बयान के रूप में नहीं देखा जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) की नीतियों पर उनका पूरा नियंत्रण होगा। ट्रंप का यह कहना कि 'जैसा मैं कहूंगा, वो वैसा ही करेंगे', सीधे तौर पर इजरायल की संप्रभुता और उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर एक बड़ा दावा है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इजरायल खुद कई मोर्चों पर युद्ध और आंतरिक राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है।

इजरायल और अमेरिका के बदलते समीकरण

आम तौर पर अमेरिका और इजरायल के रिश्ते बहुत मजबूत और आपसी समझ पर आधारित माने जाते हैं, लेकिन ट्रंप के इस नए दावे ने दोनों देशों के बीच के पारंपरिक संबंधों को एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वैश्विक मंच पर इजरायल के नेतृत्व के मुकाबले उनका कद कहीं ज्यादा बड़ा है और वे इजरायली नीतियों को अपने मुताबिक मोड़ सकते हैं। इस तरह की भाषा से इजरायल के अंदर भी हलचल मचना तय है, क्योंकि वहां की जनता और सेना अपने फैसलों में किसी बाहरी नेता का ऐसा दखल पसंद नहीं करती।

वैश्विक राजनीति : नए कूटनीतिक गठबंधनों पर भी गहरा असर

ट्रंप के इस बयान का असर केवल अमेरिका या इजरायल तक सीमित नहीं रहने वाला है। मध्य पूर्व के अन्य देश, विशेषकर वे जो इजरायल के कड़े विरोधी हैं, इस बयान को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ट्रंप का यह दावा सच मान लिया जाए, तो आने वाले समय में गाजा, लेबनान और ईरान से जुड़े बड़े फैसलों की चाबी वाशिंगटन के हाथों में जा सकती है। इससे क्षेत्र में शांति स्थापना की कोशिशों और नए कूटनीतिक गठबंधनों पर भी गहरा असर देखने को मिल सकता है।

इजरायली और अमेरिकी राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं आना शुरू

ट्रंप के इस सनसनीखेज दावे पर इजरायली खेमे और अमेरिकी राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। इजरायली विपक्ष ने इस बयान को प्रधानमंत्री नेतन्याहू की कमजोरी के रूप में पेश किया है और पूछा है कि क्या देश की नीतियां अब अमेरिकी नेताओं के इशारों पर तय होंगी। वहीं दूसरी ओर, वाशिंगटन में ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि यह ट्रंप की मजबूत लीडरशिप को दर्शाता है, जो दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं से भी अपनी बात मनवाने का माद्दा रखते हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू के आधिकारिक जवाब पर टिकीं नजरें

इस बयान के बाद अब सभी की नजरें इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू जल्द ही इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं, क्योंकि चुप्पी साधने से उनकी घरेलू राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही, व्हाइट हाउस की मौजूदा सरकार भी इस बयान को लेकर ट्रंप को घेरने की रणनीति बना रही है ताकि यह दिखाया जा सके कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ संवेदनशीलता से व्यवहार नहीं करते।

यह एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है

इस पूरे घटनाक्रम का एक पहलू यह भी है कि डोनाल्ड ट्रंप इस तरह के बड़े और आक्रामक बयानों के जरिये अमेरिकी मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि दुनिया के बड़े से बड़े संकट को सुलझाने की क्षमता सिर्फ उन्हीं के पास है। नेतन्याहू का नाम लेकर वे अमेरिकी यहूदी मतदाताओं और इजरायल समर्थक गुटों को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जहां खुद को वैश्विक राजनीति के 'सुपर बॉस' के रूप में पेश किया जा रहा है।