व्हाइट हाउस ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच बातचीत की उम्मीद जताई है। ट्रंप प्रशासन ने 10 दिन की मोहलत दी है, जबकि पर्दे के पीछे वार्ता जारी होने का दावा किया गया है। अमेरिका ने अपने सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों को भी स्पष्ट किया है।
Iran Israel America War: व्हाइट हाउस ने एक बार फिर ईरान को लेकर बातचीत की उम्मीद जताई है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह साफ नहीं हैं। बाहर से जो तस्वीर दिख रही है, वह कुछ और कहती है और अंदरखाने जो चल रहा है, उसकी कहानी अलग लगती है। सोमवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान की मौजूदा लीडरशिप बातचीत के लिए तैयार है, बल्कि उनकी बेचैनी भी झलक रही है। हालांकि, दूसरी तरफ ईरान के अधिकारी सार्वजनिक तौर पर इस बात को ज्यादा महत्व नहीं दे रहे। उनका कहना है कि अगर कोई बातचीत हो भी रही है, तो वह सीधे नहीं बल्कि बिचौलियों के जरिए हो रही है।
व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान जानबूझकर इनकार वाले बयान दे रहा है ताकि भ्रम बना रहे। लेविट ने साफ कहा कि जो कुछ सार्वजनिक मंच पर कहा जा रहा है, वह पूरी सच्चाई नहीं है। उनके मुताबिक, असली बातचीत पर्दे के पीछे जारी है और वह आगे बढ़ भी रही है। जब युद्ध की अवधि को लेकर सवाल पूछा गया, तो लेविट ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही इस ऑपरेशन को 4 से 6 हफ्तों का मानते आए हैं। अब जबकि युद्ध को 30 दिन हो चुके हैं, राष्ट्रपति अब भी उसी टाइमलाइन पर टिके हुए हैं।
एक अहम सवाल यह भी उठा कि अमेरिका जिन लोगों से बात कर रहा है, क्या वे सच में ईरान में फैसले लेने की ताकत रखते हैं? इस पर लेविट ने कहा कि अमेरिका इस बात को लेकर सतर्क है। उनका कहना था कि जिन लोगों से संपर्क किया जा रहा है, वे पहले की तुलना में ज्यादा समझदार और व्यावहारिक नजर आते हैं।
लेविट ने यह भी खुलासा किया कि ट्रंप ने ईरान को 10 दिन का समय दिया है। इस दौरान अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढांचे और पावर प्लांट्स पर संभावित हमलों को रोका हुआ है। इसे एक तरह से बातचीत का मौका भी माना जा रहा है। लेकिन साथ ही चेतावनी भी साफ है। अगर ईरान ने इस मौके का फायदा नहीं उठाया, तो अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और आगे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।