US Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान का सख्त रुख है, IRGC की “नई व्यवस्था” की तैयारी और खाड़ी देशों में मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। UAE और कुवैत की एयर डिफेंस एक्टिव है। पूरे मध्य पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील और टकराव का खतरा बढ़ता जा रहा है।
Iran Israel America War: मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सैन्य स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने साफ कर दिया है कि अब हालात पहले जैसे नहीं रहने वाले। सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब कभी भी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आएगा। खासतौर पर अमेरिका और इजराइल के लिए। इतना ही नहीं, ईरान ने यह भी संकेत दिया कि खाड़ी क्षेत्र में एक “नई व्यवस्था” लागू करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। इस बयान को सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाले बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि देश की एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रूप से मिसाइलों और ड्रोन हमलों का जवाब दे रही है। कई जगहों पर लोगों ने तेज धमाकों की आवाजें सुनीं, जिसके बाद सरकार को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि घबराएं नहीं और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि किसी भी गिरे हुए मलबे या टुकड़ों के पास न जाएं और न ही उनकी तस्वीरें लें।
इसी तरह कुवैत की सेना ने भी बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में जुटे हुए हैं। सेना के मुताबिक, जो धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, वे दरअसल हवा में ही खतरों को नष्ट करने की कार्रवाई का हिस्सा हैं। आम लोगों से यहां भी शांति बनाए रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि मामला अब सिर्फ कूटनीति या बयानबाजी का नहीं रहा। ईरान का “नई व्यवस्था” वाला बयान और खाड़ी देशों में एयर डिफेंस की सक्रियता इस ओर इशारा कर रही है कि क्षेत्र में बड़ा टकराव हो सकता है। दुनिया की नजरें अब इसी इलाके पर टिकी हैं, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन है। अगर यहां हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।