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Iran–Israel war: अमेरिका ने शुरू किया ईरान पर हमला, समुद्र से दागी मिसाइलें

Iran–Israel war : इजरायल के बाद अब अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए है। इजरायल के हवाई हमलों के बाद अमेरिका ने समुद्र से ईरान पर मिसाइलें दागी है।

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Feb 28, 2026
यूएसएस अब्राहम लिंकन (फोटो- वॉशिंगटन पोस्ट)

Iran–Israel war: इजरायल के बाद अब अमेरिका ने ईरान पर हमलों की शुरुआत कर दी है। अमेरिका ने समुद्र के रास्तों से ईरान पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दी है। अमेरिका और इजरायल के इस ज्वाइंट ऑपरेशन की शुरुआत इजरायल ने हवाई हमले के साथ की थी। इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान और सुप्रीम लीडर खामेनेई के दफ्तर समेत एक साथ 30 टारगेट पर हमले किए। इजरायली सेना ने इन हमलों पर सफाई देते हुए इन्हें प्रिवेंटिव हमला बताया है। इस हमले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पहला बयान भी सामने आ गया है। ट्रंप ने इस हमले को ईरान के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन बताया है।

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ईरान की नौसेना का नामो-निशां मिट देंगे - ट्रंप

ट्रंप का बयान सामने आने के बाद इजरायल के हमले में अमेरिका की भूमिका की पुष्टि हो गई है। ट्रंप ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि हमने ईरान में एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। हम वहां की क्रूर सरकार से पैदा होने वाले खतरे को पूरी तरह खत्म कर देंगे। हमारा लक्ष्य उनके मिसाइल सिस्टम को नष्ट करना और उनके मिसाइल बनाने वाले उद्योगों को मिट्टी में मिला देना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हम ईरान की नौसेना का भी नामो-निशां मिट देंगे।

ईरान जल्द देगा जवाब

जानकारी के मुताबिक अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान खामेनेई का निजी आवाज पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है और खामेनेई तेहरान छोड़ कर सुरक्षित स्थान पर जा चुके है। ईरान के नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के हेड, इब्राहिम अजीजी ने इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने आपको चेतावनी दी थी, अब आप ऐसे रास्ते पर चल पड़े है जिसका अंत आपके हाथ में नहीं होगा। इसी के साथ ईरान ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि वह इन हमलों का जवाब जल्द से जल्द देगा।

वेनेजुएला वाली रणनीति अपना कर किया हमला

बता दें कि, लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी। अमेरिका लंबे समय से ईरान के आसपास ओमान की खाड़ी में अपना सैन्य बेड़ा बढ़ा रहा था। युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर, यूएसएस अब्राहम लिंकन वॉरशिप, रॉजर्स वारशिप और मिसाइल सिस्टम को ईरान के पास तैनात किए हुए थे। बिल्कुल इसी तरह की रणनीति वेनेजुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने से पहले भी अमेरिका ने अपनाई थी। अमेरिका ने वेनेजुएला की समुद्री सीमा के करीब कैरेबियन सागर में अपने जंगी बेड़े तैनात किए थे और फिर मादुरो को गिरफ्तार कर लिया था। इसी तरह महीनों तक समुद्री क्षेत्र में दबाव बनाने के बाद अब अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है।

मिडिल ईस्ट में तैनात यूएसएस अब्रहाम लिंकन

यूएसएस अब्रहाम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर को अमेरिकी नौसेना की मजबूत ताकत कहा जाता है। यह निमित्ज क्लास का न्यूक्लियर पावर वाला विमानवाहक जहाज है। यह जहाज मिडिल ईस्ट में तैनात है। इसके साथ ही, अमेरिकी नौसेना के 3-4 डेस्ट्रॉयर भी साथ हैं। जोकि Arleigh Burke क्लास के हैं। USS Abraham Lincoln पर कई फाइटर जेट्स तैनात हैं। इनमें F-35C स्टील्थ फाइटर जेट, F/A-18E/F मल्टी रोल फाइटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए EA-18G Growler भी तैनात हैं। इसके साथ ही, एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन पर 5700 अमेरिकी सैनिक भी तैनात हैं। वहीं, इस कैरियर के साथ-साथ टोमहॉक क्रूज मिसाइल दागने वाले युद्धपोत भी तैनात हैं।

पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को भी तैनात किया

F15 E स्ट्राइक इगल फाइटर को भी अमेरिका ने मध्य एशिया में अपने सैनिक अड्डों पर तैनात किया है। वहीं, दर्जनों कार्गो प्लेन भी इन अड्डों पर उतरे हैं। कतर का अल उदैद एयर बेस, जोकि अमेरिका का संट्रेल कमांड मुख्यालय है, वहां हजारों सैनिक और विमान मौजूद हैं। इसके साथ ही, पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को भी तैनात किया जा रहा है, जो कि ईरानी हमलों से अमेरिकी युद्धपोतों और जहाजों की रक्षा करेंगे।

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