
चीन-ताइवान में बढ़ा तनाव। फोटो में चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (सोर्स: ANI)
China-Taiwan Latest Update: एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त होने के नाम नहीं ले रहा। वहीं दूसरी तरफ चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन ने एक बार फिर ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं।
गुरुवार को ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि चीन के 21 सैन्य विमान, 6 युद्धपोत और 2 ऑफिशियल यानी कि सरकारी जहाज उसके आसपास सक्रिय रहे। इनमें से 20 लड़ाकू विमान ताइवान की एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में सीधा घुस गए। इसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है। ताइवान की सेना ने तुरंत निगरानी बढ़ा दी। अब सवाल यही है कि आखिर चीन लगातार ऐसा क्यों कर रहा है? आइए पूरा मामला समझते हैं।
ताइवान के नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री ने भी इस बात की पुष्टि की है। सोशल मीडिया एक्स पर डिफेंस मिनिस्ट्री ने बताया कि आज गुरुवार सुबह चीन के 21 एयरक्राफ्ट, 6 युद्धपोत और 2 सरकारी जहाज ताइवान के आसपास दिखे। इनमें से 20 विमान मीडियन लाइन पार कर ताइवान के उत्तर और दक्षिण-पश्चिम हिस्से के ‘एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन’ यानी ADIZ में पहुंच गए। ताइवान की सेना ने तुरंत सभी गतिविधियों पर नजर रखी और अपने डिफेन्स सिस्टम को एक्टिव कर दिया।
यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने ऐसा किया हो। इससे पहले भी चीन कई बार ताइवान की सीमा में घुस चुका है। अभी बीते कल बुधवार को ही 12 चीनी सैन्य विमान, 10 युद्धपोत और 7 सरकारी जहाज ताइवान के आसपास देखे गए थे। इनमें से 11 विमान भी मीडियन लाइन पार कर गए थे। मंगलवार को भी ताइवान ने 4 PLA विमान, 5 युद्धपोत और 6 सरकारी जहाजों की मौजूदगी दर्ज की थी। ऐसे में लगातार बढ़ती चीन की गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। उसका कहना है कि ताइवान और चीन की सभ्यता एक है।
उसे चीन के साथ फिर से जुड़ना चाहिए। दूसरी ओर ताइवान खुद को एक अलग और लोकतांत्रिक प्रशासन वाला देश मानता है। इसी वजह से दोनों के बीच लंबे समय से विवाद जारी है।
वहीं विशेषज्ञों के अनुसार, ताइवान का मुद्दा केवल चीन और ताइवान तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, संप्रभुता, आत्मनिर्णय और क्षेत्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। चीन का दावा ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है, जबकि ताइवान अपनी अलग पहचान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखना चाहता है।
बता दें चीन ताकत के दम पर ऐसे ही तिब्बत को अपने कब्जे में लिया था। तब दलाई लामा ने चीन के बिरोध में आवाज उठाई थी। उन्होंने तब भारत और बाकी के देशों से मदद की गुहार भी लगाई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 13 से 15 मई 2026 तक तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर चीन गए थे।। बीजिंग में उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, टैरिफ, वैश्विक सुरक्षा और ताइवान जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
अमेरिका लौटने के बाद ट्रंप ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता चीन और ताइवान के बीच शांति बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी युद्ध का समर्थन नहीं करता। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका की ताइवान नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन उनका फोकस तनाव कम करने पर है। हालांकि, चीन लगातार ताइवान के आसपास सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। वहीं ताइवान अपनी सुरक्षा मजबूत करने में जुटा है और अमेरिका सहित अपने सहयोगी देशों का समर्थन चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में चीन-ताइवान संबंध किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
Updated on:
23 Jul 2026 11:56 am
Published on:
23 Jul 2026 11:55 am
