Iran Oil Threat: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सुरक्षित आवाजाही के लिए अरब और यूरोपीय देशों के सामने राजदूतों को निकालने की शर्त रखी है। जानें ट्रंप की धमकी का क्या हुआ असर।
Middle East Tension: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों का आज 11वां दिन है। जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं ईरान भी जवाबी हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि इन हमलों में ईरान की नौसेना, वायुसेना और ड्रोन क्षमता को भारी क्षति पहुंची है और उनका सैन्य ढांचा काफी हद तक कमजोर हो गया है।
हालांकि, इन हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट को लेकर दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने की आशंका पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि यदि ईरान इस मार्ग से तेल के आवागमन को रोकने का प्रयास करता है, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि, ट्रंप की इस चेतावनी का ईरान पर कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है। ईरान ने इसके उलट अरब और यूरोपीय देशों के सामने तेल की सुचारू आवाजाही के लिए 'शर्त' रख दी है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आज मंगलवार 10 मार्च को घोषणा की कि वह कुछ चुनिंदा देशों को ही 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से बेरोकटोक गुजरने की अनुमति देगा। IRGC के अनुसार, यह सुरक्षित मार्ग केवल उन्हीं अरब या यूरोपीय देशों को दिया जाएगा जो अपने देश से इजरायली और अमेरिकी राजदूतों को निष्कासित (Expel) कर देंगे।
वर्तमान युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। कीमतों में इस उछाल के मुख्य कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का आंशिक रूप से बंद होना और मध्य-पूर्व में तेल उत्पादन में आई भारी कमी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आगाह करते हुए कहा, "मैं किसी भी 'आतंकी शासन' को दुनिया को बंधक बनाने या वैश्विक तेल आपूर्ति रोकने की अनुमति नहीं दूंगा। यदि ईरान ने ऐसा दुस्साहस किया, तो उसे अब तक के सबसे कड़े सैन्य प्रहार का सामना करना पड़ेगा।"
दूसरी ओर, बाजार की उथल-पुथल और तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील देने के संकेत दिए है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके।