Iran-Israel War: युद्ध का असर पर्यावरण पर भी साफ देखने को मिल रहा है। गाजा में इजरायली हमलों के बाद वहां 3.3 करोड़ मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन हुआ। ईरान में हमले के बाद वहां के आम नागरिकों में सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं देखने को मिल रही है। एसिड रेन का भी बुरा प्रभाव पड़ा है। पढ़ें पूरी खबर...
Iran-Israel War: ईरान समेत पूरे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक बड़ा पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट भी खड़ा हो गया है। लगातार जारी बम और मिसाइल हमलों के बीच तेल भंडारण केंद्रों पर हमलों से लगी आग के कारण करोड़ों टन कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। इस कारण ईरान में अम्लीय वर्षा (एसिड रेन) भी हुई है। इसके अलावा ईरान में नागरिकों को सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं।
रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार लगातार जारी हमलों के कारण ईरान में बेहद घातक और एसिड रेन फिर से हो सकती है। यह चेतावनी गाजा-इजरायल संघर्ष को लेकर आए एक शोध के बाद आई है। इस शोध के अनुसार गाजा में इजरायली हमलों के बाद वहां 3.3 करोड़ मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन हुआ है। यह उत्सर्जन 76 लाख कारों के एक साल में निकलने वाले धुएं के बरारबर है। वहीं ईरान में जारी संघर्ष का दायरा तो और भी बड़ा है।
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस की रिपोर्ट के अनुसार तेल डिपो, रिफाइनरी और टैंकरों पर हमले हुए हैं। तेल डिपो और रिफाइनरी पर हमलों से तेहरान पर धुएं का काला गुबार छाया है। आग के कारण कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड व पार्टिकुलेटेड मैटर का उत्सर्जन काफी ज्यादा बढ़ गया है। इससे सांस लेने में परेशानी के साथ हृदय और तंत्रिका तंत्र से संबंधित परेशानियां बढ़ सकती हैं। इस बाबत डब्लूएचओ ने भी चेतावनी दी है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार ईरान पर जारी हमलों के बीच 32 लाख लोग अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। शहरों में भारी तबाही हुई है। 30 से ज्यादा अस्पताल क्षतिग्रस्त हैं। अगर युद्ध जारी रहा तो विस्थापित होने वालों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
विदेशमंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेशमंत्री अराघची से चौथी बार फोन पर बातचीत की। अराघची ने कहा, उनकी सरकार अपनी रक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। वहीं जयशंकर ने क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय व बहुपक्षीय सहयोग को विकसित करने में भारत की तत्परता व्यक्त की।