पश्चिम एशिया युद्ध ‘तेल-गैस युद्ध’ में बदलते ही ईरान-इजरायल हमलों से खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, वैश्विक बाजार गिरे और भारत की 20% गैस सप्लाई पर असर पड़ा। महंगाई, आर्थिक दबाव और ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ी।
Iran-Israel War: ईरान में सत्ता परिवर्तन करवाने तथा परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम रोकने के लिए अमरीका द्वारा शुरू किया गया पश्चिम एशिया युद्ध 20वें दिन गुरुवार को सामरिक क्षेत्र से निकलकर 'तेल-गैस युद्ध' यानी परस्पर आर्थिक ठिकाने नष्ट करने के संघर्ष में बदल गया। इजरायल ने ईरान से कतर तक फैले दुनिया के सबसे बड़े पार्स गैस फील्ड पर ईरान के हिस्से (साउथ पार्स) में हमला किया तो जवाब में ईरान ने अमरीका-इजरायल के सहयोगी खाड़ी देशों कतर, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के तेल-गैस ठिकानों पर मिसाइलें व ड्रोन हमले कर तबाही मचा दी। इससे पूरी दुनिया में आर्थिक भूचाल आ गया। कच्चे तेल के दाम बढ़ गए और शेयर मार्केट धराशायी हो गए। युद्ध को यह नया मोड़ देने में इजरायल बेकाबू दिखा वहीं अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप व उनके सहयोगी खाड़ी देश लाचार दिखे।
ट्रंप ने चाैंकाने वाला बयान दिया कि इजरायल ने उन्हें ईरानी गैस फील्ड पर हमले की जानकारी नहीं दी थी। सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि गुस्से में इजरायल ने पार्स गैस फील्ड पर हमला किया है जिसका उन्हें पता नहीं था। इजरायल भविष्य में ऐसे हमले नहीं करेगा और कतर इसमें शामिल नहीं था। ट्रंप ने धमकी दी कि ईरान ने कतर पर जवाबी कार्रवाई की तो अमरीका पूरे पार्स क्षेत्र को उड़ाने में हिचकिचाएगा नहीं। बौखलाए ईरान ने कहा कि वह पूरे क्षेत्र में तेल-गैस फील्ड पर और हमले करेगा। अमरीका का सहयोग कर रहे कतर और सऊदी अरब ने ईरानी हमलों की निंदा की और खुद एक्शन लेने की बात कही। वहीं कतर ने ईरानी दूतावास के दो अधिकारियों को अवांछित अधिकारी घोषित कर देश छोड़ने के निर्देश दिए।
कतर: रास लाफन एलएनजी प्लांट
कुवैत: मीना अल- अहमदी और मीना अब्दुल्ला रिफाइनरी
सऊदी अरब: आरामको सैमरेफ रिफाइनरी, रास तानूरा रिफाइनरी
यूएई: रूवैस रिफाइनरी, हाबसान गैस संयंत्र, बॉब ऑयल फील्ड
कतर के रास लफ्फन सिटी पर ईरानी हमले के कारण भारत के कुल प्राकृतिक गैस आयात का 20% हिस्सा सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। यानी रोजाना होने वाली 47.4 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एमएमएससीएम) की सप्लाई अचानक रुक सकती है। गैस की कमी का सबसे बड़ा असर देश में बिजली उत्पादन और फर्टिलाइजर कारखानों पर पड़ेगा। तेल महंगा होने से भारत का आयात खर्च बढ़ेगा और चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है। इससे रुपए और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही महंगाई बढ़ने का भी खतरा है। भारत का करीब 15% खाड़ी देशों को जाता है और करीब 40त्न पैसा (रेमिटेंस) वहीं से आता है।
यूएस-ईरान युद्ध तेल-गैस युद्ध बनने और क्रूड के दाम बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार को गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद एक दिन में सबसे बड़ा झटका लगा। भारतीय शेयर बाजार में 21 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 2497 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 3.26% की बड़ी गिरावट के साथ 23,002 पर बंद हुआ। इससे कंपनियों की बाजार पूंजी एक दिन में ही 11.66 लाख करोड़ रुपए घट गई। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध थमने के संकेत नहीं होने पर शुक्रवार को भी बाजार गिर सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा अवसंरचनाओं पर हमलाें को अस्वीकार्य बताते हुए इन्हें बंद करने की आवश्यकता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने पहले भी इस क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हाल ही में हुए हमले बेहद चिंताजनक हैं और पूरी दुनिया के लिए पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अधिक अस्थिर करने का काम करते हैं।