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ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, खामेनेई के बेटे ने संभाली देश की कमान

Iran–Israel war: ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीड बन गए है।
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Updated: 1 Mar 2026, 1:49 PM IST
Mojtaba Khamenei
मोजतबा खामेनेई (फोटो- Sona एक्स पोस्ट)

Iran–Israel war: इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद पूरी दुनिया में सनसनी फैल गई है। इजरायल के हमले अब भी जारी है और ईरान लगातार अमेरिका और इजरायल के खिलाफ पलटवार कर रहा है। ईरान की स्थिति लगातार बिगड़ रही है लेकिन इसके बावजूद ईरान झुकने को तैयरा नहीं है। खामेनेई की मौत के बाद अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने देश की कमान संभाल ली है। मोजतबा ईरान के नए सर्वोच्च नेता घोषित कर दिए गए है।

ईरान में 40 दिनों का शोक घोषित

आंतरिक विचार विमर्श और धार्मिक राजनीतिक संस्थानों के परामर्श के बाद 56 वर्षीय मोजतबा ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर के रूप में पदभार संभाल लिया है। 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हमलों में मौत हो गई जिसके बाद उनके बेटे की सर्वोच्च नेता के तौर पर नियुक्ति की गई है। खामेनेई की मौत पर ईरान में 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की गई है। इसके अलावा 7 दिनों के सार्वजनिक अवकाश का भी ऐलान किया गया है। इसके साथ ही वर्तमान हालातों को देखते हुए देश की सुरक्षा को कई गुणा बढ़ा दिया गया है।

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने की नियुक्ति

अमेरिका और इजरायल के लगातार दबाव के बावजूद भी ईरान झुकने को तैयार नहीं है। देश में नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति हो गई है और जवाबी कार्रवाई अभी भी जारी है। ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर की नियुक्ति का अधिकार असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के पास होता है। यह 88 वरिष्ठ धर्मगुरुओं की एक संस्था है, जो नए नेता के चयन की जिम्मेदारी निभाती है। हालांकि, अभी तक इस निकाय की बैठकों और विचार विमर्श का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह संवैधानिक ढांचे के भीतर अंजाम दिया गया।

मोजतबा के नाम पर लंबे समय से चर्चा

मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान के धार्मिक प्रतिष्ठान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से करीबी संबंधों के लिए जाने जाते रहे हैं। उन्हें संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पहले भी देखा जाता रहा था, हालांकि उनके नाम पर आंतरिक बहस भी होती रही। देश के कट्टर समर्थकों ने इसे क्रांतिकारी सिद्धांतों की निरंतरता बताया है, जबकि कुछ वर्गों ने सत्ता के केंद्रीकरण पर चिंता जताई है। जानकारों का मानना है कि गार्जियन काउंसिल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स और अन्य प्रमुख संस्थाएं आगे भी ईरान के शासन में अहम भूमिका निभाती रहेंगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व देश के भीतर व्यापक समर्थन हासिल कर पाता है या नहीं।

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1 Mar 2026, 1:49 PM IST
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