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Iran-Israel War: मध्य पूर्व तनाव के बीच ब्रिटेन का बड़ा यू-टर्न, अमेरिका को दिए सैन्य ठिकाने

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिका को अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई को लेकर यह कदम अहम माना जा रहा है, हालांकि देश के भीतर इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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Mar 21, 2026
Iran-Israel War(AI Image-ChatGpt)

Iran-Israel War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने अपनी विदेश नीति में एक अहम मोड़ ले लिया है। अब उसने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है, ताकि ईरान के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और समुद्री रास्तों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने साफ कर दिया कि अमेरिका अब ब्रिटेन के कुछ प्रमुख सैन्य बेस का उपयोग कर सकेगा। इन बेसों में आरएएफ फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया शामिल हैं। माना जा रहा है कि इन ठिकानों से ईरान के उन मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है, जिनका इस्तेमाल जहाजों पर हमलों के लिए हो रहा है।

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Iran-Israel War: पहले कार्रवाई से अलग था ब्रिटेन


दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले ब्रिटेन का रुख बिल्कुल अलग था। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने तब ऐसे किसी भी कदम को टाल दिया था। उनका कहना था कि बिना ठोस कानूनी आधार के किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल होना सही नहीं होगा, और ब्रिटेन किसी बड़े युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता। खाड़ी क्षेत्र में ईरान की ओर से बढ़ती गतिविधियों और ब्रिटेन के सहयोगी देशों पर हुए हमलों ने लंदन को अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर दिया। अब सरकार इसे “सामूहिक आत्मरक्षा” का मामला बता रही है। यानी, अगर सहयोगियों पर खतरा है, तो जवाब देना जरूरी हो जाता है।

Iran-Israel War: अमेरिका का दबाव अहम वजह माना जा रहा


ब्रिटेन के भीतर इस फैसले को लेकर मतभेद भी सामने आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका का दबाव भी एक अहम वजह माना जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन की आलोचना करते हुए उसे “निराश करने वाला सहयोगी” कहा था। ऐसे में ब्रिटेन का यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, ब्रिटेन सिर्फ सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता। उसने साथ ही यह भी कहा है कि हालात को जल्द से जल्द शांत किया जाना चाहिए। सरकार ने अपील की है कि तनाव कम करने और किसी बड़े संघर्ष से बचने के लिए सभी पक्ष बातचीत का रास्ता अपनाएं।

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