
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Photo - IANS)
ब्रिटेन ने तीन लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। उन्हें युद्ध के दौरान ईरान को आर्थिक सहायता देने के जुर्म में दोषी पाया गया है। ताजा कार्रवाई के बाद दुनिया भर में खलबली मच गई है।
ये खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि ईरान पर पहले से ही कई सैंक्शंस लगे हुए हैं। ब्रिटेन सरकार साफ तौर पर कह रही है कि ऐसे काम देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
अदालत के मुताबिक, इन तीनों ने ईरान के कुछ कार्यक्रमों या संगठनों को पैसे पहुंचाने में मदद की। ये पैसे शायद प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।
पुलिस की जांच में पता चला कि ये लोग लंबे समय से ऐसे नेटवर्क से जुड़े थे जो ईरान तक पैसा पहुंचाता था। बैंक ट्रांसफर, छिपे हुए रास्ते और कुछ कंपनियों का इस्तेमाल करके ये काम किया जा रहा था। जांच एजेंसियों ने लंबी मॉनिटरिंग के बाद इनके घरों पर छापे मारे और सबूत इकट्ठा किए।
अदालत में पेश सबूतों से साफ हुआ कि आरोपी जानबूझकर नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। एक आरोपी पर तो ये भी आरोप लगा कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े लोगों से संपर्क रखा था। ब्रिटेन में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत ये केस चला और जूरी ने सभी को दोषी पाया।
ब्रिटेन की सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को कोई नहीं तोड़ सकता। ऐसे लोग देश की सुरक्षा को कमजोर करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये फैसला दूसरों के लिए भी सबक है जो ईरान जैसे देशों के साथ छुपकर आर्थिक डील करते हैं।
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संबंध लंबे समय से खराब चल रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय तनाव और कई अन्य मुद्दों की वजह से ब्रिटेन समेत कई देश ईरान पर सख्ती बरत रहे हैं। इस मामले में भी यही बैकग्राउंड काम कर रहा है।
कई वकीलों का मानना है कि ब्रिटेन अब राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में और सख्त हो गया है। नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत ऐसी सजाएं आसानी से दी जा रही हैं। आम लोग भी इस खबर पर हैरान हैं क्योंकि उम्रकैद जैसी सजा आमतौर पर बहुत गंभीर अपराधों में ही सुनाई जाती है।
Updated on:
12 May 2026 06:55 pm
Published on:
12 May 2026 06:47 pm
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