
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-ANI)
Geopolitics : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के पटल पर एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि कभी अमेरिका को आंख दिखाने वाला क्यूबा अब अस्तित्व बचाने के लिए वॉशिंगटन की ओर देख रहा है। ट्रंप के अनुसार, वेनेजुएला और ईरान जैसे सहयोगियों पर सख्त अमेरिकी कार्रवाई के बाद क्यूबा अलग-थलग पड़ गया है और अब उसने सीधे तौर पर अमेरिका से मदद की गुहार लगाई है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया बयान में क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि क्यूबा अब उस मोड़ पर है जहां उसके पास बातचीत के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। ट्रंप ने कहा:
'किसी भी रिपब्लिकन ने कभी मुझसे क्यूबा के बारे में गंभीरता से बात नहीं की है। हकीकत यह है कि क्यूबा एक विफल देश है। यह केवल एक ही दिशा में जा रहा है-और वह है नीचे! लेकिन अब, क्यूबा मदद मांग रहा है, और हम उनसे बात करने जा रहे हैं। ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका अब क्यूबा के साथ 'स्ट्रेंथ' यानि मजबूती की स्थिति से बातचीत करेगा। यह बदलाव पिछले कई दशकों की शीत युद्ध वाली दुश्मनी के बाद एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा की इस लाचारी के पीछे वेनेजुएला और ईरान पर अमेरिका का बढ़ता दबाव है। क्यूबा अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक मदद के लिए लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और ईरान के समर्थन पर निर्भर रहा है। हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन ने ईरान की घेराबंदी तेज की है और वेनेजुएला के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। जब इन दोनों देशों की अपनी अर्थव्यवस्थाएं संकट में आईं, तो क्यूबा को मिलने वाली 'लाइफलाइन' कट गई। ईंधन की कमी, बिजली संकट और खाद्य सामग्री की किल्लत ने क्यूबा की सरकार को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर दिया है।
ट्रंप के इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका क्यूबा को कोई 'बेलआउट पैकेज' देगा या इसके बदले वहां लोकतांत्रिक सुधारों की शर्त रखी जाएगी। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत यह साफ है कि कोई भी मदद बिना किसी बड़े भू-राजनीतिक लाभ के नहीं दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कहना कि "हम उनसे बात करने जा रहे हैं,' यह दर्शाता है कि आने वाले दिनों में हवाना और वॉशिंगटन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हो सकती है। यदि यह बातचीत सफल होती है, तो यह लातिन अमेरिका में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के लिए एक बड़ा झटका होगा।
Updated on:
12 May 2026 06:30 pm
Published on:
12 May 2026 06:30 pm
