Oil Prices:इज़रायल ने ईरान के 30 से अधिक तेल ठिकानों पर भीषण बमबारी की है, जिससे ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इस अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई और तबाही से हैरान अमेरिका (व्हाइट हाउस) ने इज़रायल को "WTF" का विवादित कूटनीतिक संदेश भेजा है।
WTF Message: ईरान और इज़रायल के बीच चल रहे भयंकर युद्ध ने अब एक नया और बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। इज़रायल ने ईरान के ऊर्जा और तेल सेक्टर (Iran Oil Fields) पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। इस अप्रत्याशित हमले के बाद न सिर्फ खाड़ी देशों में खलबली मची है, बल्कि इज़रायल के सबसे करीबी सहयोगी अमेरिका के भी होश उड़ गए हैं। इज़रायली वायुसेना ने ईरान के 30 से ज़्यादा तेल और फ्यूल डिपो पर भीषण बमबारी कर उन्हें खाक में मिला दिया है। इस चौंकाने वाले कदम ने ग्लोबल मार्केट को हिला कर रख दिया है और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में रातों-रात भारी उछाल देखने को मिला है। US WTF Message और इस पूरी घटना ने दुनिया भर के निवेशकों की धड़कनें तेज कर दी हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज़्यादा चर्चा व्हाइट हाउस के उस कथित 'विवादित संदेश' की हो रही है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स और एक्सिओस (Axios) के हवाले से यह बात सामने आई है कि जब अमेरिका को हमले के असली पैमाने का अंदाज़ा हुआ, तो उनकी तरफ से इज़रायली अधिकारियों को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए "WTF" का संदेश भेजा गया। यह साफ दर्शाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रशासन इस हमले के इतने बड़े स्तर से पूरी तरह अनजान था और अपने सहयोगी के इस एकतरफा कदम से बेहद खफा है।
हालांकि अमेरिका को पहले से इज़रायल की किसी सैन्य कार्रवाई की भनक तो थी, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि इज़रायल ईरान के 30 तेल ठिकानों को एक साथ निशाना बनाएगा। अमेरिका की मुख्य चिंता यह है कि तेल डिपो जलने से न सिर्फ मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग और भड़केगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू हो जाएंगी। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि तेल के भंडारों को बचाना ज़्यादा ज़रूरी है, न कि उन्हें जलाकर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को संकट में डालना।
इस भीषण हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आस-पास के इलाकों में काले धुएं का गुबार छा गया। तेल के कुओं और डिपो में लगी भयंकर आग सड़कों तक फैल गई, जिससे 'आग की नदी' जैसा खौफनाक नज़ारा उत्पन्न हो गया। ज़ाहिर है कि इस विध्वंस के बाद ईरान भी शांत बैठने वाला नहीं है। उसने पलटवार करते हुए इज़रायल और कुछ समर्थक खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए अपने जवाबी हमले तेज़ कर दिए हैं।
इस महायुद्ध के 10वें दिन हुए इस हमले ने पहली बार अमेरिका और इज़रायल के अटूट माने जाने वाले रिश्तों के बीच एक बड़ी असहमति को दुनिया के सामने ला दिया है। व्हाइट हाउस का वह छोटा सा लेकिन बेहद तीखा संदेश ("WTF") इस बात का पुख्ता सुबूत है कि अमेरिका इस युद्ध को उस दिशा में जाते नहीं देखना चाहता जहाँ दुनिया को एक भयंकर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़े। इज़रायल का तर्क है कि ईरान इसी तेल की कमाई से अपने मिसाइल प्रोग्राम को चलाता है, इसलिए उसकी आर्थिक कमर तोड़ना ज़रूरी था। अब देखना यह है कि इज़रायल अपने इस आक्रामक रवैये पर कायम रहता है या अमेरिकी दबाव में अपनी रणनीति में बदलाव करता है।