
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच जंग फिर से तेज़ हो गई है। ईरान पर अमेरिकी हमले के खिलाफ आईआरजीसी - इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पहले बहरीन (Bahrain) और फिर कुवैत (Kuwait) पर एयरस्ट्राइक्स की। इसके बाद भी ईरान के हमले रुके नहीं और अब आईआरजीसी ने जॉर्डन (Jordan) पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं हैं।
आईआरजीसी ने जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस (Muwaffaq Salti Air Base) को निशाना बनाया है। इस एयरबेस को अल-अज़राक एयरबेस (Al-Azraq Air Base) के नाम से भी जाना जाता है और मिडिल ईस्ट में यह अमेरिका का मुख्य सैन्य ठिकाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईआरजीसी ने अमेरिकी फाइटर जेट्स को निशाना बनाया है। हालांकि इस हमले से कितना नुकसान हुआ है, इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। फरवरी में आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला था कि जॉर्डन के इस एयरबेस पर 60 से ज़्यादा अमेरिकी विमान तैनात थे, जिनमें 30 F-35 स्टील्थ फ़ाइटर जेट्स और 36 F-15 फ़ाइटर जेट्स शामिल थे।
जॉर्डन पर हमले के बाद अमेरिका ने एडवाइज़री जारी की है। अमेरिकी विदेश विभाग के कांसुलर मामलों के विभाग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "खबरों के अनुसार जॉर्डन के एयरस्पेस में मिसाइलें, ड्रोन्स या रॉकेट्स देखे गए हैं। ऐसे में सभी नागरिकों से अपील की जाती है कि वो तुरंत किसी सुरक्षित जगह या छत के नीचे शरण लें। घर के अंदर ही रहें और स्थानीय घोषणाओं और अलर्टस पर ध्यान दें। जॉर्डन में अमेरिकी दूतावास स्थिति पर नज़र रखेगा और ज़रूरत पड़ने पर और जानकारी देगा।"
आईआरजीसी ने बुधवार को भी जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस (अल-अज़राक एयरबेस) पर हमला किया था। आईआरजीसी के अनुसार इस हमले में अमेरिकी फाइटर जेट्स (F-35, F-15) के हैंगर, कमांड सेंटर, लिविंग क्वार्टर्स, रडार सिस्टम और सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिडिल ईस्ट में जॉर्डन को अमेरिका के सहयोगी देशों में से एक माना जाता है और अमेरिकी सेना की तरफ से मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया जाता है।