
Middle East War Update: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब चिंता सिर्फ ‘होर्मुज स्ट्रेट’ तक सीमित नहीं रही। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और उसके सहयोगी ऐसे हालात बनाने की तैयारी में हैं, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एनालिसिस में दावा किया गया है कि ईरान तेज और हाई-इंटेंसिटी युद्ध की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र के तेल ठिकानों, रिफाइनरियों और बंदरगाहों को निशाना बनाया जा सकता है। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा ‘बाब अल-मंडेब स्ट्रेट’ को बंद या बाधित करने की आशंका ने खतरे को और बढ़ा दिया है। अगर ऐसा होता है, तो होर्मुज के बाद दुनिया के सामने एक और अहम समुद्री रास्ता संकट में आ जाएगा। इससे तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक व्यापार तक हर स्तर पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उल्टा-पुल्टा और हद से ज्यादा दबाव वाला व्यवहार बातचीत और कूटनीति के रास्ते में बड़ी बाधा बन रहा है।
पाकिस्तान के गृह मंत्री सैयद मोहसिन नकवी से मुलाकात के दौरान अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिकी सरकार पर भरोसा नहीं है, क्योंकि अमेरिका पहले भी कई बार अपने वादों से पीछे हट चुका है।
बता दें सोमवार को हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने ईरान-पाकिस्तान संबंधों और ईरान-अमेरिका के बीच जारी बातचीत पर विस्तार से चर्चा की।
वहीं US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप लगातार बातचीत के लिए जोर दे रहे हैं, साथ ही धमकी दे रहे हैं कि अगर तेहरान वाशिंगटन की सीजफायर की शर्तों को मानने से मना करता है तो वह उस पर हमला कर देंगे। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ईरान पर हमले की प्लानिंग को कुछ समय के लिए टाल दिया है।
प्रेसिडेंट ट्रंप ने आगे कहा- "मैंने इसे (ईरान पर हमला) थोड़ी देर के लिए टाल दिया है, उम्मीद है शायद हमेशा के लिए, लेकिन शायद थोड़ी देर के लिए क्योंकि ईरान के साथ हमारी बहुत बड़ी बातचीत हुई है और हम देखेंगे कि उनका क्या नतीजा निकलता है। मुझसे सऊदी अरब, कतर, UAE और कुछ दूसरों ने पूछा था कि क्या हम इसे दो या तीन दिन, थोड़े समय के लिए टाल सकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे डील करने के बहुत करीब पहुंच रहे हैं…यह एक बहुत ही पॉजिटिव डेवलपमेंट है, लेकिन हम देखेंगे कि इसका कुछ नतीजा निकलता है या नहीं,"
वहीं US अधिकारियों का कहना है कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप अभी भी बातचीत से समझौता चाहते हैं, लेकिन तेहरान के उन समझौतों को मानने से इंकार कर रहा है।