
Moon
चांद (Moon) तक पहुंचना सिर्फ तकनीक की नहीं, ईंधन की भी लड़ाई है। अंतरिक्ष मिशनों की कुल लागत का बड़ा हिस्सा रॉकेट के ईंधन पर खर्च होता है। नासा (NASA) के विशाल स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट को ही एक उड़ान में 20 लाख लीटर से ज्यादा ईंधन चाहिए। अब पुर्तगाल की यूनिवर्सिटी ऑफ कोइम्ब्रा और ब्राज़ील की यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो के वैज्ञानिकों ने ऐसा गणितीय 'शॉर्टकट' खोजा है, जो चंद्र मिशनों को कहीं ज़्यादा किफायती बना सकता है।
वैज्ञानिकों ने 'थ्योरी ऑफ फंक्शनल कनेक्शंस' नाम के गणितीय ढांचे की मदद से पृथ्वी और चांद के बीच 3 करोड़ संभावित मार्गों का कंप्यूटर सिमुलेशन करते हुए नया रास्ता खोजा। यह रास्ता काफी सस्ता भी है और अब तक के सबसे कुशल मार्गों की तुलना में 58.8 मीटर प्रति सेकंड कम ईंधन मांगता है। यह बचत टनों ईंधन और करोड़ों डॉलर की लागत घटा सकती है।
यह नया मार्ग पृथ्वी और चांद के बीच स्थित L1 लैग्रेंज बिंदु का इस्तेमाल करता है। लैग्रेंज पॉइंट अंतरिक्ष के ऐसे संतुलित स्थान होते हैं, जहाँ दो बड़े पिंडों के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं। यहाँ अंतरिक्ष यान बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च किए खुद को 'पार्क' कर सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि पृथ्वी की तरफ से नहीं, बल्कि चांद के करीब वाले हिस्से से इस कक्षा में प्रवेश ज्यादा फायदेमंद है। अंतरिक्ष में कुल 5 लैंग्रेज पॉइंट हैं।
1. ईंधन और वजन का फायदा
यान जितना भारी होगा, ईंधन की बचत उतनी ही बड़ी होगी। उदाहरण के लिए, 100 टन कार्गो ले जाने वाले स्पेसएक्स के स्टारशिप जैसे विशाल यान के लिए यह रास्ता करोड़ों डॉलर बचा सकता है।
2. नो ब्लैकआउट
यान हमेशा पृथ्वी की सीधी नज़र में रहेगा। नासा के 'आर्टेमिस 2' मिशन के दौरान यान जब चांद के पीछे गया था, तो कुछ समय के लिए संपर्क टूट गया था। इस नए रास्ते पर कभी भी 'संचार ब्लैकआउट' नहीं होगा।
3. पर्यटन और माइनिंग हब
भविष्य में L1 बिंदु अंतरिक्ष पर्यटन, चंद्र माइनिंग और ट्रांजिट स्टेशन के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है। यहां से एक तरफ पूरी पृथ्वी और दूसरी तरफ पूरा चांद दिखाई दे सकेगा।
Updated on:
19 May 2026, 4:10 PM IST
Published on:
19 May 2026, 4:09 PM IST
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