Geopolitics:ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने विश्व पटल पर स्पष्ट कर दिया है कि देश की सीमाओं और संप्रभुता पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बाहरी ताकतों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा।
Middle East Tension: मौजूदा समय में दुनिया भर, विशेषकर मध्य पूर्व के तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक बेहद कड़ा और साफ रुख अपनाया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर दुनिया को साफ शब्दों में बता दिया है कि उनके देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में कोई समझौता मंजूर नहीं किया जाएगा। पेजेशकियन ने यह लकीर खींच दी है कि ईरान अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में किसी भी विदेशी ताकत की दखलअंदाजी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका इशारा अमेरिका की ओर है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को कई बार धमकियां दे चुके हैं और अपनी शर्तें मनवाने के लिए बार-बार दबाव बना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ईरान के राष्ट्रपति के इस सख्त बयान पर तेजी से रिएक्शन दिया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान उन पश्चिमी देशों और क्षेत्रीय विरोधियों के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश है, जो ईरान पर लगातार आर्थिक और सैन्य दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ईरान के सहयोगी देशों ने इस साहसिक और स्पष्टवादी कदम का खुल कर समर्थन किया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।
उनकी सेनाएं किसी भी संभावित खतरे या हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। इस अहम बयान के फालोअप के तौर पर, ईरानी सैन्य बलों और रिवोल्युशनरी गार्ड्स ने अपनी सभी सीमाओं पर सतर्कता और गश्त काफी बढ़ा दी है। ईरान के रक्षा मंत्रालय ने भी तुरंत एक बुलेटिन जारी कर स्पष्ट किया कि उनकी सेनाएं किसी भी संभावित खतरे या हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। साथ ही, ईरानी संसद में भी देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सैन्य बजट बढ़ाने और सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के नए प्रस्तावों पर चर्चा शुरू हो गई है।
इस पूरे मामले का एक अहम पहलू ईरान की घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति पेजेशकियन अपने देश की जनता के बीच एक मजबूत और निडर नेता की छवि स्थापित करना चाहते हैं। लंबे समय से कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और महंगाई से जूझ रही ईरानी अवाम को यह संदेश दिया जा रहा है कि उनकी सरकार किसी भी बाहरी दबाव या पश्चिमी मुल्कों की धमकियों के आगे झुकने वाली नहीं है। विश्लेषक इसे कूटनीति के साथ-साथ एक शानदार राजनीतिक चाल भी मान रहे हैं।