Geopolitics: ईरान ने मीनाब स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने इसे 170 से अधिक मासूमों की जान लेने वाले युद्ध अपराध को छिपाने की अमेरिकी साजिश करार दिया है।
Middle East: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के उस बयान का पुरजोर खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि फरवरी महीने में मीनाब के जिस स्कूल पर मिसाइल गिरी थी, वह असल में एक मिसाइल लॉन्चिंग फैसिलिटी का हिस्सा था। तेहरान ने वाशिंगटन के इस रुख को 'मनगढ़ंत और बेबुनियाद' करार देते हुए कहा है कि इस झूठ का एकमात्र मकसद 170 से ज्यादा स्कूली बच्चों और शिक्षकों की दर्दनाक मौत पर पर्दा डालना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक बयान में ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिकी दावों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे एक 'भयानक और घिनौना झूठ' बताते हुए कहा कि यह शर्मनाक बयान 28 फरवरी को हुए उस मिसाइल हमले की कड़वी सच्चाई को दबाने की कोशिश है, जिसने 170 से ज्यादा बच्चों और उनके गुरुओं की जिंदगी छीन ली। बगाई ने जोर देकर कहा कि पढ़ाई के वक्त किसी चलते हुए स्कूल को निशाना बनाना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन और एक स्पष्ट युद्ध अपराध है, जिसे तकनीकी बहानों के पीछे नहीं छुपाया जा सकता। उन्होंने इस विनाशकारी हमले के जिम्मेदार अमेरिकी सैन्य कमांडरों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सजा देने की मांग की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी प्रवक्ता का यह तीखा बयान अमेरिकी सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के उस बयान के बाद आया है, जो उन्होंने हाउस कमेटी की सुनवाई में दिया था। कूपर ने दावा किया था कि वह स्कूल आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स) के एक सक्रिय क्रूज मिसाइल बेस के बहुत करीब था, जिसकी वजह से यह पूरी घटना आम हमलों की तुलना में ज्यादा पेचीदा हो गई। हालांकि, उन्होंने जांच के बाद पूरी पारदर्शिता बरतने का भरोसा भी दिया था।
इसी बीच, ईरानी मीडिया आईआरआईबी के हवाले से खबर आई कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि पिछले 40 दिनों से चल रहे इस युद्ध के दौरान उनके मंत्रालय या किसी भी दूतावास से किसी भी राजनयिक ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने अपने मिशनों की तारीफ करते हुए कहा कि तमाम मुश्किलों के बाद भी उनके किसी अधिकारी ने मैदान नहीं छोड़ा।
दूसरी तरफ, राजनयिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया के इस संकट को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से एक नया युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। ईरान इस समय इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है। मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के प्रस्तावों के अंतर को पाटने में जुटे हैं, यही वजह है कि ईरान ने अभी इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। इन शांति वार्ताओं के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के भी तेहरान दौरे की चर्चा है, लेकिन उनका यह दौरा तभी मुमकिन होगा जब ईरान इस नए शांति प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे देगा।
इससे पहले प्रवक्ता इस्माईल बगाई ने यह साफ किया था कि ईरान बेहद 'संदेह' की नजर से देखने के बावजूद अमेरिका के साथ 'सद्भावना' के तहत बातचीत की मेज पर है। प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान को उसके 14 सूत्रीय एजेंडे पर अमेरिकी जवाब मिल चुका है, जिसकी समीक्षा की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया को गति देने के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी तेहरान पहुंचे हैं। बगाई ने स्पष्ट किया कि ईरान की पहली प्राथमिकता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी इस जंग को तुरंत रोकना है। इसके साथ ही ईरान अपनी जब्त संपत्तियों की बहाली और अपने जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग पर अड़ा है। ( इनपुट : ANI)