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युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद ईरान ने बेचा 1.7 लाख करोड़ का तेल, सरकार ने बताए आंकड़े

Iran's Oil Sale: अमेरिका से युद्ध शुरू होने के बाद और फिर होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के बाद कई देशों को लगा था कि ईरानी तेल की बिक्री पूरी तरह से बंद हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हाल ही में ईरान के तेल मंत्री ने देश की तेल बिक्री के आंकड़े बताए हैं।
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Jul 25, 2026
Iranian oil
ईरानी तेल (Representational Photo)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ था, जो करीब 40 दिन चला। इस दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए। होर्मुज स्ट्रेट और ईरानी बंदरगाहों पर भी नाकेबंदी लगाई। 7 अप्रैल को पहली बार दोनों देशों के बीच सीज़फायर लागू हुआ, जिसे 17 जून को बढ़ा दिया। 14 जून को प्रस्तावित शांति समझौते पर 17 जून को हस्ताक्षर हुए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म हो गया, अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हुई और आगे की बातचीय शुरू हो गई। हालांकि दोनों देशों ने सीज़फायर का कई बार उल्लंघन किया और 8 जुलाई को शांति समझौता और सीज़फायर खत्म हो गया, जिसके बाद लगातार हमलों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया। हालांकि इतने समय में ईरान ने कितना तेल बेचा, मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है।

ईरान ने बेचा 1.7 लाख करोड़ का तेल

अमेरिका से युद्ध शुरू होने के बाद और फिर होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के बाद कई देशों को लगा था कि ईरानी तेल की बिक्री पूरी तरह से बंद हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद (Mohsen Paknejad) ने जानकारी दी है कि ईरान ने युद्ध के दौरान 11.5 बिलियन डॉलर और सीज़फायर के दौरान 6.5 बिलियन डॉलर का तेल बेचा, यानी कुल 18 बिलियन डॉलर का तेल ईरान ने इस दौरान बेचा। भारतीय करेंसी में इसकी वैल्यू करीब 1.7 लाख करोड़ रूपए है।

प्रतिबंधों के बावजूद पीछे नहीं हटा ईरान

पाकनेजाद ने कहा कि युद्ध और प्रतिबंधों (आर्थिक प्रतिबंध और नाकेबंदी) के बावजूद ईरान ने अपनी सालाना तेल से होने वाली अनुमानित कमाई का 60% से ज़्यादा हिस्सा इस दौरान ही हासिल किया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिकी प्रयासों के बावजूद ईरान ने जमकर तेल बेचा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी इसकी उम्मीद नहीं की होगी। हालांकि इस दौरान ईरान की तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और होर्मुज स्ट्रेट के बार-बार बंद होने से ग्लोबल तेल बाजार पर भी दबाव बढ़ा। इससे कई दिन तो ईरानी तेल की बिक्री काफी कम रही। युद्ध के दौरान तेल की ग्लोबल कीमत में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली।