
BRICS Summit: ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ नई दिल्ली में 26-27 अक्टूबर को होने वाले 12वें BRICS संसदीय मंच में शामिल नहीं होंगे। भारत में ईरानी दूतावास ने उनकी अनुपस्थिति के पीछे ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ का हवाला दिया है। उनकी जगह ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा।
भारत में ईरान के दूतावास ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की। दूतावास ने स्पष्ट किया कि इस्लामिक सलाहकार सभा के स्पीकर गालिबाफ BRICS सदस्य देशों की संसदों के स्पीकरों की इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकेंगे।
बयान में यह भी कहा गया कि, 'BRICS के एक सक्रिय सदस्य के रूप में ईरान इस समूह के शिखर सम्मेलनों और बैठकों में उच्च स्तर पर प्रभावी भागीदारी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।' ईरानी प्रतिनिधिमंडल अन्य सदस्य देशों के साथ संवाद जारी रखेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य संसदीय संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत करना है। इसके साथ ही ईरान ने इस बैठक की मेजबानी के लिए भारतीय सरकार की शानदार मेहमाननवाजी और पुख्ता व्यवस्थाओं के लिए हार्दिक आभार जताया है।
यह प्रतिष्ठित 12वां BRICS संसदीय मंच नई दिल्ली के ऐतिहासिक संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय मंच में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी इसमें शामिल होने की पूरी उम्मीद है।
इस मंच का मुख्य फोकस वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर संसदीय सहयोग को मजबूत करना, लोगों के केंद्रित विकास को बढ़ावा देना, नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल बदलाव और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना है। इस आयोजन में BRICS के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। भारत, चीन, रूस, ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई प्रमुख देश इसमें शामिल हैं, जबकि बेलारूस, मलेशिया और उज्बेकिस्तान जैसे साझेदार देश भी इसका हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब और इथियोपिया के प्रतिनिधि भी इस बैठक में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
इससे पहले भारत ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS नेताओं के ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। उस दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने विशेष रूप से भारत का दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी हुई थी, जिसमें भारत-ईरान के आपसी संबंधों और पश्चिम एशिया के ताजा हालात पर विस्तार से चर्चा की गई थी।