
Iran Threatens to Close Bab al-Mandeb: मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान की ओर से हाल ही में दिए गए बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इजरायल-लेबनान संघर्ष के बीच रणनीतिक समुद्री मार्ग बाब अल-मंदेब को बाधित करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान समर्थित रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने बयान दिया कि यदि इजरायल द्वारा गाजा और लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो प्रतिरोध की धुरी (Axis of Resistance) जवाबी कदम उठाने के लिए तैयार है। इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है।
अरबी भाषा में बाब अल-मंदेब का अर्थ होता है आंसुओं का दरवाजा। यह एक संकरा लेकिन वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) से जोड़ता है।
इस संकरे जलमार्ग से प्रतिदिन हजारों मालवाहक जहाज गुजरते हैं, जो इसे वैश्विक सप्लाई चेन की लाइफलाइन बनाता है।
एशिया-यूरोप व्यापार का प्रमुख मार्ग
बाब अल-मंदेब विश्व के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट्स में से एक है। भारत, चीन, जापान जैसे एशियाई देशों के मैन्युफैक्चरिंग हब से यूरोप जाने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 10–12 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से संचालित होता है। इसमें शामिल हैं-
यह मार्ग केवल व्यापारिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति में भी इसकी बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस मार्ग से गुजरते हैं। कतर सहित खाड़ी देशों से निकलने वाली LNG (Liquefied Natural Gas) की बड़ी आपूर्ति यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव पड़ सकता है।
यदि बाब अल-मंदेब असुरक्षित या बंद हो जाता है, तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे
वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, ऊर्जा संकट की स्थिति, सप्लाई चेन में देरी तथा वैश्विक महंगाई में तेज उछाल ये सभी वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण हैं। इन कारकों के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और आम जनता की जीवन-यापन की लागत पर भी सीधा असर पड़ता है।