Negotiations: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ किया है किया है कि शांति के लिए वार्ता को उनकी कमजोरी या सरेंडर न समझा जाए। ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अपना कड़ा जवाब भेज दिया है, जिससे खाड़ी में युद्ध का तनाव चरम पर है।
Geopolitics: वैश्विक भू-राजनीति में उस वक्त बड़ी हलचल मच गई, जब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय ताकतों के साथ किसी भी तरह की बातचीत को ईरान का आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि ईरान अपने लोगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में खड़ा है और वह अपने दुश्मनों के आगे कभी सिर नहीं झुकाएगा। हाल ही में अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व में युद्ध रोकने के लिए दिए गए शांति प्रस्ताव पर ईरान ने अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिये वाशिंगटन को भेज दी है।
अमेरिका ने क्षेत्र में जारी तनाव और युद्ध को खत्म करने के लिए '9-सूत्री शांति योजना' पेश की थी। इसके जवाब में ईरान ने एक '14-सूत्री योजना' का कड़ा मसौदा तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में ईरान ने स्पष्ट मांग की है कि अमेरिका उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाए, ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करे और पूरे खाड़ी क्षेत्र से अपने सैनिकों को वापस बुलाए। इसके साथ ही, लेबनान में चल रहे इजरायली सैन्य अभियानों को रोकने की शर्त भी रखी गई है। ईरान का यह मास्टरप्लान 30 दिनों के भीतर अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की रूपरेखा पेश करता है।
एक तरफ मेज पर शांति की बातें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ समुद्र में बारूद की गंध फैल रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसका 'रणनीतिक संयम' अब खत्म हो चुका है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रवक्ता इब्राहीम रजाई ने चेतावनी दी है कि अगर उनके किसी भी जहाज पर खरोंच भी आई, तो वे अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों को तबाह कर देंगे। यह धमकी तब आई है जब हाल ही में ओमान की खाड़ी में अमेरिकी लड़ाकू विमानों की ओर से दो ईरानी जहाजों पर फायरिंग की खबरें सामने आई थीं।
समुद्री मार्गों पर स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। हाल ही में कतर जा रहे एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन से हमला किया गया, जिसे लेकर ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संचालन संस्था ने भी पुष्टि की है। वहीं, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि जिस जहाज को निशाना बनाया गया, वह अमेरिकी झंडे वाला था। इन लगातार हो रहे हमलों ने दुनिया भर के व्यापारिक रास्तों और आपूर्ति श्रृंखला को खतरे में डाल दिया है।
इस कड़े ईरानी जवाब के बाद वाशिंगटन में लगातार आपात बैठकों का दौर जारी है। अमेरिकी अधिकारी अब ईरान के इस 14-सूत्री प्रस्ताव का कूटनीतिक और सैन्य विश्लेषण कर रहे हैं। वहीं, खाड़ी देशों कतर, सऊदी अरब और यूएई में बहुत घबराहट है, क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध का सीधा असर उनके तेल व्यापार और सुरक्षा पर पड़ेगा।
सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि अमेरिका इस ईरानी प्रस्ताव पर क्या औपचारिक प्रतिक्रिया देता है। इस बीच, ईरान के शीर्ष सैन्य प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के साथ गुप्त बैठक की है, जिसमें सेना को 'दुश्मनों का सामना करने के लिए नए निर्देश' जारी किए गए हैं। इससे साफ है कि ईरान आर-पार की लड़ाई के लिए अपनी सेना को पूरी तरह से तैयार रख रहा है।
बहरहाल, इस पूरी तनातनी के बीच पाकिस्तान की भूमिका एक अहम 'मध्यस्थ' के रूप में उभर कर सामने आई है। पाकिस्तान के जरिये कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान यह दर्शाता है कि सीधे संवाद की कमी के बावजूद दोनों देश अमेरिका और ईरान बातचीत की एक खिड़की खुली रखना चाहते हैं, ताकि कोई गलतफहमी सीधे विश्व युद्ध का रूप न ले ले। (इनपुट: ANI)